Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश राज्य चुनाव आयोग को 2 सप्ताह के भीतर मतदान की सूचना देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही OBC आरक्षण के बिना स्थानीय निकाय चुनावों का आदेश भी दिया।कोर्ट ने कहा आरक्षण देने के ट्रिपल टेस्ट को पूरा करने के लिए और वक्त नहीं दिया जा सकता।कोर्ट ने यह भी कहा कि पिछले दो साल से 23 हजार के करीब स्थानीय निकाय के पद खाली पड़े है। पांच साल में चुनाव करना सरकार का संवैधानिक दायत्व है।

Supreme Court: सरकार न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव कराने के लिए तैयार

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पिछले शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई थी। इस बाबत कोर्ट ने 10 मई के लिए अपना फैसला भी सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग ने प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिए जाने के आधार संबंधी रिपोर्ट पेश की थी। इसमें ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा की गई है।सरकार की ओर से कहा गया कि हम न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव कराने के लिए तैयार हैं।
प्रदेश में त्रिस्तरीय यानी (ग्राम, जनपद और जिला) पंचायत और नगरीय निकाय (नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगम) में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए कोर्ट ने अध्ययन कराने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद राज्य सरकार ने राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग गठित किया था। जिसने मतदाता सूची का परीक्षण कराने के बाद दावा किया कि प्रदेश में 48 प्रतिशत मतदाता ओबीसी हैं। इस आधार पर रिपोर्ट में त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकाय के चुनाव में ओबीसी को 35 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुशंसा करते हुए सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई।
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