
Pollution Live Update: पूरे Delhi-NCR में प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक हालत में है। दिल्ली के जनपथ में वायु गुणवत्ता ‘खतरनाक’ स्तर पर दर्ज की गयी है। शुक्रवार सुबह जनपथ में वायु गुणवत्ता 655.07 रही है। अदालत के आदेश के बाद भी दिल्ली एनसीआर के लोगों ने दीवाली के अवसर पर जमकर पटाखे छोड़े। पूरे एनसीआर में धुंध की एक मोटी चादर देखी जा सकती है।
दिल्ली एनसीआर का कोई भी ऐसा हिस्सा नहीं है जहां कि वायु गुणवत्ता अच्छी कही जा सकती है। कृष्णा मेनन लेन और रेल भवन के सामने की तस्वीर आप नीचे देख सकते हैं।
वायु प्रदूषण में पराली के धुएं का रहता है योगदान
दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान पिछले साल दीवाली के दिन 32 प्रतिशत था, जबकि 2019 में यह 19 प्रतिशत था। अक्टूबर में रिकॉर्ड तोड़ बारिश और पराली जलाने से धुएं की “प्रतिकूल” हवा की दिशा के कारण दिल्ली के वायु प्रदूषण में पराली के धुएं का योगदान इस मौसम में अब तक कम रहा है।
SAFAR ने कहा कि अगले तीन दिनों तक दिल्ली की स्थानीय हवा की स्थिति “बहुत शांत” रहने की उम्मीद है। पटाखे न फोड़े जाने की स्थिति में दिल्ली की पीएम 2.5 कॉन्सनट्रेशन 4 नवंबर से 6 नवंबर तक ‘बहुत खराब’ श्रेणी के ऊपरी छोर पर रहने का अनुमान है। सफर ने कहा, “हालांकि, अगर हम 2019 के पटाखों के भार का 50 प्रतिशत मानते हैं, तो इस अवधि के दौरान एक्यूआई के ‘गंभीर’ श्रेणी में आने का अनुमान है।”
राष्ट्रीय राजधानी में पीएम 2.5 की कॉन्सनट्रेशन 5 नवंबर को 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर को पार कर सकती है। सुरक्षित सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। 27 अक्टूबर को, दिल्ली सरकार ने पटाखे फोड़ने के खिलाफ जागरूकता पैदा करने के लिए ‘पटाखे नहीं दिए जलाओ’ अभियान शुरू किया था।
अभियान के तहत पटाखे जलाने वाले पाए जाने पर संबंधित आईपीसी प्रावधानों और कानून के तहत कार्रवाई की जा रही है। 28 सितंबर को, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने 1 जनवरी, 2022 तक राष्ट्रीय राजधानी में पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है।
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