जानिए क्या होते हैं Exit Polls और कैसे ये करवाये जाते हैं?

वैसे तो एग्जिट पोल्स को लेकर विभिन्न तरह के मत है, लेकिन पुख्ता तौर पर सबसे पहले एग्जिट पोल की शुरुआत नीदरलैंड्स के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वॉन डैम (Marcel van Dam) ने की थी

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जानिए क्या होते है Exit Polls और कैसे ये करवाये जाते हैं? - APN News
Exit Polls

देश के दो राज्यों हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) (12 नवंबर) एवं गुजरात (Gujarat) (1 दिसंबर एवं 5 दिसंबर) में मतदान समाप्त हो गया है. लेकिन नतीजों के आने से पहले अगर किसी चीज का लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे तो वो हैं एग्जिट पोल (Exit Polls). आज हम एग्जिट पोल की ही कहानी बताने जा रहे हैं.

किसी भी लोकतंत्र में होने वाली चुनावी प्रक्रिया की दो कड़ी होती हैं और वो दो कड़ी हैं- नेता चुनाव लड़ते हैं और जनता वोट देती है. इसके बाद नतीजे घोषित किए जाते हैं. चुनावों में नतीजे ऐसे चीज होते हैं, जिनको जानने की उत्सुकता हर किसी के मन में होती है.

लेकिन चुनावों में पिछले कुछ दशकों से एक और प्रक्रिया भी जुड़ गई है और वो है ‘एग्जिट पोल’ और ‘ओपिनियन पोल’. ‘एग्जिट पोल’ और ‘ओपिनियन पोल’ को अगर आसान भाषा में समझा जाया तो इसका अर्थ है नतीजों से पहले ही उसकी थाह लेना. दुनियाभर में जैसे-जैसे तकनीक का विकास हो रहा है, चुनावी सर्वे का स्वरूप भी बदलता जा रहा है. आज के समय में सरकार और राजनीतिक दल भी इन सर्वे एजेंसियों का सहारा लेकर जनता की नब्ज को टटोलने लगे हैं. इन सर्वे के आधार पर ही सरकारी नीतियों से लेकर चुनावी रणनीतियां तय होने लगी हैं.

कैसे हुई थी ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल की शुरुआत?

आमतौर पर चुनावी हार जीत के अनुमानों को लेकर दो तरह के सर्वे किये जाते हैं. पहला होता है एग्जिट पोल (Exit Polls), इस सर्वे को तब किया जाता है जब वोटर वोट देकर निकलता है तो उससे सवाल पूछे जाते हैं. इसके अलावा मतदाता से सीधा सवाल भी किया जाता है कि आखिर उसने किसको वोट दिया है. इसके साथ-साथ अन्य सवाल भी किए जाते हैं. वोटर से पूछे गए सवालों के जवाब का जातिवार, क्षेत्रवार और मुद्दों के आधार पर विश्लेषण किया जाता है. इसके बाद एग्जिट पोल के नतीजे निकलते हैं.

वैसे तो एग्जिट पोल्स को लेकर विभिन्न तरह के मत हैं, लेकिन पुख्ता तौर पर सबसे पहले एग्जिट पोल की शुरुआत नीदरलैंड्स के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वॉन डैम (Marcel van Dam) ने की थी. वॉन डैम ने नीदरलैंड्स के चुनावों में 1967 में पहली बार इसका इस्तेमाल किया था.

वहीं, ओपिनियन पोल का इस्तेमाल जनता का मूड जानने के लिए भी किया जाता है. Opinion Poll की शुरुआत अमेरिका से हुई जहां सबसे पहले जॉर्ज गैलप और क्लॉड रॉबिंसन ने अमेरिकी लोगों के बीच सैंपल सर्वे के जरिए उनकी राय को जानना चाहा. उसके बाद ब्रिटेन (The UK) और फ्रांस (France) में भी ओपिनियन पोल का भी सहारा लिया. ब्रिटेन में 1937 और फ्रांस में 1938 में पहली बार ओपिनियन पोल हुआ था जिसके नतीजे काफी सटीक पाये गए.

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भारत में पहली बार कब हुए थे Opinion Poll?

भारत में Opinion Poll की शुरुआत इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन (THE Indian Institute OF Public Opinion) के प्रमुख एरिक डी कोस्टा ने की थी. सबसे पहले ओपिनियन पोल को देशभर के पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया था. वहीं, 1998 मे पहली बार 1998 इसे एक टीवी चैनल पर दिखाया गया.

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Exit Polls
भारत में शुरुआत से ही विवादों में

दुनियाभर के देशों में जैसे-जैसे ओपिनियन पोल जितनी तेजी के साथ लोकप्रिय हुए, उससे कहीं ज्यादा तेजी से इसे लेकर विवाद भी खड़े हुए. भारत मे चुनाव आयोग ने 1999 में बाकायदा एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिये ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. हालांकि इस आदेश को लेकर एक समाचार पत्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. जिसके बाद आयोग के इस आदेश को कोर्ट ने निरस्त कर दिया और कहा कि आयोग के पास ऐसे आदेश जारी करने की शक्ति नहीं है.

2009 में आया सबसे बड़ा मोड़

2009 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन किया. संशोधन के अनुसार जब तक चुनावी प्रक्रिया के दौरान अंतिम वोट नहीं डाल दिया जाता, तब तक एग्जिट पोल के नतीजे जारी नहीं किए जा सकता है. हालांकि ओपिनियन पोल पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है लेकिन इसकी मांग समय-समय पर उठती रहती है.

किन चीजों के आसरे तय होते हैं नतीजे

ओपिनियन पोल में जो तीन चीजें सबस जरूरी होती हैं वो है समय, सैंपल साइज और मुद्दे. सर्वे को लेकर पंचायत चुनाव, विधान सभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में सैंपल साइज अलग-अलग होते हैं. सैंपल साइज को बड़ा कर देने के बावजूद हर क्षेत्र और जाति वर्ग तक नहीं पहुंचे तो भी अंतर आएगा. इसी कारण सर्वे के नतीजों में 5-10 सीटें कम या ज्यादा का अंतराल दिखाते हैं.

चूंकि भारत में मतदान एक गोपनीय प्रक्रिया है. यहां मतदाता जल्दी खुलकर अपनी बात नहीं कहता इसलिए सर्वे में कई बार सीधे सवाल न करके मुद्दों पर भी किए जाते हैं. उससे जनता का मन भांपते हैं. यही वजह है कि पहले खुलकर आत्मविश्वास के साथ अपनी राय रखने वालों और ढुलमुल राय रखने वालों को अलग-अलग रखकर रेटिंग देते हैं. उसके बाद उनका विश्लेषण किया जाता है. एग्जिट पोल में मतदाता ज्यादा मुखर होता है. यही वजह है कि वे ज्यादा सटीक होते हैं.

इसके अलावा सामान्य तौर पर एक विधानसभा पर कम से कम 3,000-4,000 मतदाताओं की राय ली जाती है. यदि 250 से 300 बूथ हैं तो कोशिश यह कि जाती है कि हर बूथ पर 10 से 15 लोगों की राय ली जाए. वहीं, लोकसभा में यह दायरा बढ़कर 15,000 से 20,000 सैंपल तक हो जाता है. इससे कम सैंपल लेने पर नतीजों के सही होने पर संदेह ही रहता है.