Jawed Akhtar’s B’Day: सिनेमा देखने का मजा उस समय दोगुना हो जाता है, जब उसकी पटकथा ऐसी सधी हुई हो, जो दर्शकों को लास्ट सीन तक सीट पर बैठाए रखे। बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्में देखने को मिलतीं हैं, जिसकी दमदार कहानी से लेकर, डॉयलॉग आज भी लोगों की जुबां पर रटे हुए हैं।ऐसे मशहूर लेखक हैं जावेद अख्तर, जिन्हें लोग जावेद साहब के नाम से भी जानते हैं। साल 2007 में पद्म भूषण से नवाजे जा चुके इस उम्दा लेखक का आज यानी 17 जनवरी को बर्थ डे है।
ग्वालियर में 17 जनवरी 1945 को जन्मे जावेद अख्तर के पिता जान निसार अखतर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अख्तर उर्दू की मशहूर लेखिका तथा शिक्षिका थीं। जावेद साहब बहुत छोटे थे, तभी इनकी मां का निधन हो गया।उनक पिता ने दूसरी शादी कर ली।र कुछ दिन भोपाल में अपनी सौतेली मां के घर रहने के वे अपने नाना-नानी के घर लखनऊ में रहे। इसके बाद उन्हें अलीगढ़ में उनकी खाला के घर भेज दिया गया। जहां के उन्होंने शुरुआती स्कूली तालिम हासिल की। उसके बाद वह वापस भोपाल आ गए, जहां से उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई को पूरा किया।

Jawed Akhtar’s B’Day: स्क्रिप्ट के साथ डॉयलॉग पर मजबूत पकड़
हिंदी सिनेमा में गजलों को नया आयाम और रूप देने में जावेद साहब का बहुत बड़ा योगदान है।उनकी जोड़ी उस दौर के मशहूर लेखक सलीम खान के साथ सुपरहिट रही। दोनों की जोड़ी ने शोले, जंजीर समेत कई बड़ी फिल्मों की पटकथा लिखी।इस जोड़ी को सिनेमा में सलीम-जावेद के नाम से भी जाना जाता है।
1971-1982 तक करीबन 24 फिल्मों में दोनों ने एक साथ किया। जिनमें सीता और गीता, शोले, हाथी मेरा साथी, यादों की बारात, दीवार जैसी फिल्मे शामिल हैं।जिसमें से लगभग 20 फिल्में बॉक्स-ऑफिस पर ब्लाक-बस्टर हिट साबित हुईं।
साल 1987 में आई मिस्टर इंडिया फिल्म के बाद सलीम-जावेद की सुपरहिट जोड़ी अलग हो गई। बावजूद इसके जावेद अख्तर ने फिल्मों के लिए डायलॉग लिखने का काम जारी रखा। उन्हें उनके गीतों के लिए 8 बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
Jawed Akhtar’s B’Day: जानिए जावेद अख्तर से जुड़ी अनसुनी बातें

- Jawed Akhtar’s B’Day: जावेद अख्तर का असली नाम जादू है। उनके पिता की कविता थी, ‘लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा’ से उनका यह नाम पड़ा था। जावेद नाम जादू से मिलता-जुलता, इसलिए उनका नाम जावेद अख्तर कर दिया।
जावेद अख्तर 4 अक्टूबर 1964 को मुंबई आए थे। उन दिनों उनके हालात ठीक नहीं थे।आलम ये था कि कई रातें उन्होंने सड़कों पर खुले आसमान के नीचे सोकर बिताईं।आखिरकार बाद में कमाल अमरोही के स्टूडियो में उन्हें ठिकाना मिला।
सलीम खान के साथ जावेद अख्तर की पहली मुलाकात ‘सरहदी लुटेरा’ फिल्म की शूटिंग के दौरान हुई। इस फिल्म में सलीम खान हीरो थे और जावेद क्लैपर ब्वॉय। हालांकि बाद में इन दोनों ने मिलकर बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दीं।
सलीम खान और जावेद अख्तर को सलीम-जावेद बनाने का श्रेय डायरेक्टर एसएम सागर को जाता है। एक बार उन्हें राइटर नहीं मिला था और उन्होंने पहली बार इन दोनों को मौका दिया।
अक्सर सलीम खान स्टोरी आइडिया देते थे और जावेद अख्तर डायलॉग लिखने में मदद करते थे। जावेद अख्तर उर्दू में ही स्क्रिप्ट लिखते हैं, जिसका बाद में हिंदी ट्रांसलेशन किया जाता है
70 के दशक में स्क्रिप्ट राइटर्स का नाम फिल्मों के पोस्टर पर नहीं दिया जाता था, लेकिन सलीम-जावेद ने बॉलीवुड में उन बुलंदियों को छू लिया था कि पोस्टरों पर राइटर्स का भी नाम लिखा जाने लगा
जावेद अख्तर की पहली पत्नी हनी ईरानी थीं, जिनके साथ उनकी पहली मुलाकात ‘सीता और गीता’ के सेट पर हुई थी।हनी और जावेद का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है
जावेद अख्तर नास्तिक हैं। उन्होंने अपने बच्चों- जोया और फरहान को भी परवरिश ऐसे ही माहौल में की है
वह अपने शुरुआती दिनों में कैफी आजमी के सहायक भी थे। बाद में उन्हीं की बेटी शबाना आजमी के साथ उन्होंने दूसरी शादी की
Jawed Akhtar’s B’Day: जावेद साहब की कलम से निकले अनमोल गीत

- Jawed Akhtar’s B’Day: देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुए – फिल्म सिलसिला
- तुम को देखा तो ये ख्याल आया- फिल्म साथ-साथ
- एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा- फिल्म 1942 एक लव स्टोरी
- संदेसे आते हैं, हमें तड़पाते हैं- फिल्म बॉर्डर
- राधा कैसे ना जले – फिल्म लगान
- दो पल रूका – फिल्म वीर-जारा
- हर घड़ी बदल रही है धूप जिंदगी, कल हो न हो- फिल्म कल हो न हो
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