छात्रवृत्ति योजना बनी लाखों छात्रों का सहारा, प्रयागराज सबसे अधिक लाभार्थियों वाला जिला

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उत्तर प्रदेश सरकार की पिछड़ा वर्ग दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 27 लाख से अधिक विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। लाभार्थियों की संख्या के मामले में प्रयागराज पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा, जहां करीब 1.69 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी छात्र की शिक्षा में बाधा न बने। यही कारण है कि छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाया गया है। पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में सहायता राशि सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जा रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज एवं सरल हुई है।

आंकड़ों के अनुसार प्रयागराज के बाद गाजीपुर दूसरे स्थान पर रहा, जहां 1.34 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति मिली। आजमगढ़ में 1.19 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला, जबकि जौनपुर में 1.15 लाख से ज्यादा छात्रों को योजना से जोड़ा गया। वाराणसी में भी 88 हजार से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई। यह दर्शाता है कि योजना का लाभ प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक स्तर पर पहुंच रहा है।

छात्रवृत्ति योजना का दायरा केवल इंटरमीडिएट तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के साथ-साथ स्नातक, स्नातकोत्तर, आईटीआई, पॉलिटेक्निक तथा बीटेक, एमबीबीएस, एमबीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इससे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को भी बड़ी राहत मिल रही है।

योजना के आंकड़े बताते हैं कि छात्राओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही है। कक्षा 11 और 12 स्तर पर 4.72 लाख से अधिक छात्राओं को छात्रवृत्ति मिली, जबकि 3.80 लाख से अधिक छात्रों और दो ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिला। उच्च शिक्षा स्तर पर 10 लाख से अधिक छात्राओं, 9.31 लाख छात्रों तथा आठ ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इससे स्पष्ट है कि सरकार समावेशी शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।

इस योजना का लाभ उन विद्यार्थियों को मिलता है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय दो लाख रुपये या उससे कम है। आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन छात्रवृत्ति प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से संचालित की जाती है। सत्यापन और स्वीकृति के बाद सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक कठिनाइयों के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्ति योजना का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों तक इसका लाभ पहुंच सके।

प्रदेश सरकार का मानना है कि शिक्षा सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी सोच के अनुरूप छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति जैसी योजनाओं को मजबूत बनाया जा रहा है, जिससे युवाओं को बेहतर शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।