Supreme Court में एक याचिका दायर की गई है जिसमें CBSE, ICSE और NIOS बोर्ड को निर्देश देने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर 21 फरवरी को सुनवाई करने का फैसला कर लिया है। दरअसल, इस याचिका में बाल अधिकार वकील अनुभा श्रीवास्तव सहाय ने मांग की है कि कम्पार्टमेंट वाले छात्रों समेत सभी छात्रों की मार्किंग का फॉर्मूला तय करने और साथ ही तय समय सीमा में परिणाम घोषित करने के लिए एक समिति के गठन का निर्देश दिया जाए।

ट्विटर के जरिए साझा की जानकारी
बाल अधिकार वकील अनुभा श्रीवास्तव सहाय ने इस बात की जानकारी अपने ट्विटर पर पोस्ट शेयर करते हुए दी। Adv Anubha Shrivastava Sahai ने अपने ट्वीट में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट 21 फरवरी 2022 को दर्ज कराई गई याचिका पर सुनवाई करने वाला है। दरअसल, वकील अनुभा श्रीवास्तव सहाय ने देशभर के 15 लाख से अधिक छात्रों की तरफ से यह याचिका दायर की है।
Supreme Court में दायर की गई याचिका में हैं ये मांगें
- बोर्ड अब परीक्षाओं को ऑफलाइन मोड में आयोजित करने जा रहा है लेकिन दायर की गई याचिका में मांग की है कि परीक्षा को ऑफलाइन मोड में कराए जाने के बजाय मूल्यांकन का वैकल्पिक तरीका अपनाया जाए।
- याचिका में मांग की गई है कि विश्वविद्यालयों में प्रवेश की तिथि घोषित करने के लिए UGC की एक समिति गठित करने का निर्देश भी दिया जाए।
- इसके साथ ही कहा गया है कि 12वीं के जो छात्र गैर व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेना चाहते हैं, उनके लिए एक Eligibility Exam या कोई दूसरे तरीके की परीक्षा आयोजित की जाए जिसमें उन छात्रों का मूल्यांकन करने के लिए सही फॉर्मूला अपनाया जाए।
- इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि जो छात्र अपने आंतरिक मूल्यांकन से संतुष्ट नही हैं उनके लिए सुधार परीक्षा भी आयोजित की जाए।
- याचिका में मांग की गई है कि कुछ राज्य बोर्ड ने समय सारिणी घोषित कर दी है। वहीं CBSE, ICSE और NIOS बोर्ड अभी भी चर्चा कर रहे हैं, इस समय यह मूकदर्शक बने हुए हैं। अब तक 10वीं और 12वीं के करोड़ों छात्रों की परीक्षा और अंतिम परिणाम घोषित करने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
संबंधित खबरें:
NEET PG 2022 के लिए Supreme Court ने केंद्र सरकार को दी हिदायत
Hijab Controversy: कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को Supreme Court में चुनौती, छात्रा ने दायर की याचिका