National Medical Commission (NMC) ने युवा वर्ग के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। एनएमसी ने 5 फरवरी को एक निर्देश जारी किया है जिसमें फैसला लिया गया है कि अब सभी निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50% सीटों की फीस संबंधित राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर कर दी जाएगी।

एनएमसी ने नोटिस जारी कर दी जानकारी
जारी किए गए इस नोटिस में कहा गया है कि शुल्क में छूट का लाभ पहले उन उम्मीदवारों को दिया जाएगा जिन्होंने सरकारी कोटे में दाखिला लिया होगा, लेकिन संस्थानों में केवल 50 फीसदी सीटों पर ही छूट दी जाएगी। छात्रों को यह लाभ मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। एनएमसी ने यह फैसला एनएमसी अधिनियम, 2019 की धारा 10(1)(i) के तहत लिया है। इस धारा के लागू होने के बाद एनएमसी निजी चिकित्सा संस्थानों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50% सीटों के लिए शुल्क निर्धारित करने के लिए दिशा-निर्देशों को तैयार कर सकता है।
MCI ने केंद्र सरकार से किया था अनुरोध
तत्कालिन MCI (Medical Commission Of India) ने 2019 में केंद्र सरकार के Board Of Governors से मेडिकल संस्थानों के शुल्क से जुड़ें दिशा-निर्देशों को तैयार करने के लिए अनुरोध किया था। जिसके बाद 23 नवंबर, 2019 को Board Of Governors (BOG), MCI (Medical Commission Of India) और एनएमसी की ओर से एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। जिसमें MBBS और PG Medical Courses के लिए निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों के शुल्क निर्धारण के लिए 26 दिशानिर्देशों को लागू करने की सिफारिश की गई थी। इस सिफारिश पर 1800 से अधिक लोगों ने अपनी सहमति जताई थी।

रिपोर्ट पर विचार के बाद फैसला
National Medical Commission की ओर से यह फैसला काफी विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। नोटिस में जारी किए गए आदेश के अनुसार कोई भी संस्थान छात्रों से कैपिटेशन शुल्क नहीं लेगा। साथ ही उसमें कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना होगा की शिक्षा का कार्य लाभ कमाने के लिए न हो, लाभ कमाने के तरीकों को फीस में शामिल करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।
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