Adani Power Case के पक्ष में आए फैसले पर पुनर्विचार याचिका पर CJI की अध्यक्षता में गुजरात ऊर्जा विकास लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई की गई। आज सुनवाई के दौरान संविधान पीठ में दोनों कंपनियों के बीच 2009 में हुए बिजली खरीद-बिक्री पर विवाद को लेकर 2019 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के ही फैसले पर पांच जजों की पीठ फिर से विचार करने पर सहमति बनी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
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क्या है मामला
दरअसल अडानी पावर मुंद्रा लिमिटेड के खिलाफ गुजरात ऊर्जा विकास लिमिटेड ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। जिसपर सुनवाई हो रही है। ये मामला गुजरात ऊर्जा विकास लिमिटेड (जीयूवीएल) की सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) से जुड़ा है। दरअसल, अडानी पावर ने जीयूवीएल के साथ विद्युत खरीद करार यह कहते हुए तोड़ दिया था कि गुजरात मिनरल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन (जीएमडीसी) उसे कोयला आपूर्ति करने में विफल रहा है। इसके खिलाफ जीयूवीएल ने गुजरात राज्य विद्युत नियामक आयोग का दरवाजा खटखटाया था, जिसने करार रद्द किये जाने को अवैध ठहराया था।
इस फैसले के खिलाफ अडानी समूह ने अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया और उसने भी आयोग के निर्णय को जायज ठहराया था। इसके बाद अडानी समूह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जुलाई 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अडानी समूह के हित में फैसला सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ जीयूवीएल ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इसके बाद 3 सितंबर को पुनर्विचार याचिका खारिज कर दिया गया। इसके बाद जीयूवीएल ने सुधारात्मक याचिका दायर की। इस याचिका पर दौरान शीर्ष अदालत ने अडानी पावर को नोटिस जारी किया है।
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