Indian Rupee: हथेली पर नोट किसे पसंद नहीं होगा, खुशी तब और भी अधिक बढ़ जाती है, जब नोट बेहद नया यानी कड़कता हुआ हो, इसी रुपये को पाने के लिए हर इंसान दिन और रात कड़ी मेहनत करता है। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि गुलाबी, हरे और संतरी रंग के नोट आखिर किस चीज के बने होते हैं। आमतौर पर आजकल हम जिस करेंसी यानी नोट का इस्तेमाल करते हैं वो दरसअल शुद्ध कॉटन यानी रूई से निर्मित होता है ।
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पुराने समय से होता आ रहा है रुपये का चलन
Indian Rupee: देश में मुद्रा का चलन प्राचीन काल से ही होता आ रहा है। बात करें अगर रुपये की तो इस शब्द का इस्तेमाल पहली बार शेरशाह सूरी ने किया था। उसने अपने शासनकाल में चांदी का सिक्का जारी किया था, जिसे वो रुपया कहकर पुकारता था। यहीं से रुपये शब्द की उत्पत्ति हुई।
अंग्रेजों ने की बैंक नोट की शुरुआत: भारत में कागज के नोट का चलन 1770 ईसवी से माना जाता है। इस दौरान प्रचलित बैंक ऑफ हिन्दुस्तान से कागज के नोट जारी किए थे। ब्रिटिश काल में ही 1917 के आसपास एक रुपये के कागज के नोट जारी किए गए। 1926 में महाराष्ट्र के नासिक में बैंक नोट छापने की शुरुआत की गई। आजाद भारत में बैंक नोट का चलन सर्वप्रथम 1949 में हुआ। एक रुपये के नोट जारी करने के साथ हुआ।
Indian Rupee: 100 फीसदी रूई से बनता है कड़क नोट : रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी के अनुसार रुपया जिसे हम बैंक नोट भी कहते हैं 100 फीसदी रूई से बनाया जाता है। इसकी मुख्य वजह कागज की बजाय कॉटन का ज्यादा मजबूत होना माना गया है। जोकि कागज के मुकाबले कम फटता है। कॉटन 75 प्रतिशत जबकि करीब 25 प्रतिशत लिनेन का इस्तेमाल किया जाता है।
दोनों की चीजों को गिलेटिन नामक चिपचिपे पदार्थ में मिक्स कर तैयार किया जाता है। कागज के बदले रूई को अधिक टिकाऊ माना जाता है। यही वजह है कि नोटों के निर्माण में इसका इस्तेमाल किया जाता है। आरबीआई के अनुसार इसकी छपाई से लेकर आम जनमानस तक पहुंचाने में कई चरण पूरे किए जाते हैं।
Indian Rupee:अलग-अलग रुपये की छपाई में कितना होता है खर्च? आरबीआई नोट छापने के लिए एक मिनिमम रिजर्व सिस्टम नियम का पालन करता है। यानी रिर्जव बैंक को नोट प्रिंटिंग के विरुद्ध न्यूनतम 200 करोड़ रुपये का रिजर्व हमेशा रखता है। इसमें 115 करोड़ रुपये गोल्ड और 85 करोड़ रुपये की विदेशी करेंसी रखनी जरूरी है।
200 रुपये का नोट छापने पर आरबीई की लागत 2.39 रुपये आती है। 500 रुपये के नोट को छापने पर 2.94 रुपये खर्च होते हैं। देश के सबसे बड़े नोट दो हजार रुपये के नोट पर छपाई की लागत करीब 3.54 रुपये आती है।
Indian Rupee: भारतीय रुपये का जारीकर्ता भारतीय रिजर्व बैंक होता है। इसकी देखरेख में देश के कुछ इलाकों में बनी टकसाल में इनकी छपाई का काम पूरा किया जाता है। इसके साथ ही एक रुपये का नोट जारी करने का अधिकार वित्त मंत्रालय के पास होता है। इस पर वित्त सचिव अपने हस्ताक्षर करते हैं।
इसे RBI (Reserve Bank Of India) आरबीआई की जगह वित्त मंत्रालय जारी करता है। एक रुपये का नोट जितना छोटा है उतनी ही रोचक उसका इतिहास भी है। वर्ष 1926 में तत्कालीन ब्रिटिश राज में इसकी छपाई बंद कर दी गई थी, लेकिन 1940 में दोबारा इसका चलन शुरू किया गया। वर्ष 1994 में एक रुपये के नोट की छपाई बंद कर दी गई। आखिरकार साल 2015 में दोबारा इसकी शुरुआत हुई। नोट के ठीक ऊपर Govt. Of India यानी भारत सरकार अंकित होता है।
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