Bihar By Election Result 2021: बिहार में तारापुर (tarapur) और कुशेश्वर स्थान (kusheshwar asthan) सीट पर उपचुनाव के परिणाम कुछ ही देर में सामने आ जाएंगे। इन उपचुनाव में काफी कुछ नया भी और बहुत कुछ अलग भी है। अलग बात ये है कि 6 साल बाद राजद सुप्रीमो लालू यादव (Lalu Yadav) चुनाव प्रचार किया और दोनों सीटों पर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। नयी बात ये है कि कांग्रेस और राजद अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए मुकाबला तीन तरफा बताया जा रहा है।
हालांकि राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इन उपचुनाव में अगर विपक्ष की जीत होती है तो मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। वहीं जदयू प्रत्याशी जीत जाते हैं तो नीतीश कुमार सरकार को और मजबूती मिलेगी। क्यों ऐसा माना जा रहा है? आइए समझते हैं।
एनडीए के पास फिलहाल बहुमत है
सत्ता पक्ष की बात की जाए तो इस समय एनडीए के पास 126 विधायकों का समर्थन है। जिसमें सबसे अधिक सीटें बीजेपी के पास हैं। भगवा पार्टी के पास 74 विधायक हैं। वहीं एनडीए में दूसरे नंबर पर सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड है। जेडीयू के पास 43 विधायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू के 43 विधायक जीते थे। लेकिन पार्टी के दो विधायकों का निधन हो गया था। तारापुर और कुशेश्वरस्थान सीटें इन्हीं विधायकों के निधन से खाली हो गयी थीं। जहां उपचुनाव हो रहे हैं। हालांकि लोजपा और बसपा के एक-एक विधायक जदयू में शामिल हो गए हैं।
एनडीए में इस समय पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी HAM और मुकेश सहनी की पार्टी VIP का कद एक सा है। दोनों पार्टियों के पास 4-4 विधायक हैं। एनडीए को एक निर्दलीय विधायक का समर्थन भी है।
विपक्ष की क्या है स्थिति?
विपक्ष की बात की जाए तो इस समय बिहार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल है। उसके पास 75 विधायक हैं। इसके अलावा भाकपा (माले) के 12 विधायक हैं। भाकपा और माकपा के दो-दो विधायक हैं। कांग्रेस के इस समय 19 विधायक सदन में हैं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के कुल 5 विधायक सदन में हैं। यानी विपक्ष में अभी कुल 115 विधायक हैं।
अगर तारापुर और कुशेश्वरस्थान सीट पर विपक्ष की जीत होती है तो?
बिहार की राजनीति को समझने वालों का कहना है कि अगर तारापुर और कुशेश्वरस्थान सीट पर विपक्ष की जीत होती है तो विपक्ष में 117 विधायक होंगे। इसके बाद विपक्ष को सरकार पर दबाव बनाने में और आसानी होगी।
मांझी और सहनी बढ़ा सकते हैं नीतीश कुमार की चिंता, बन सकते हैं किंगमेकर
नीतीश कुमार को सबसे अधिक चिंता मुकेश सहनी और जीतनराम मांझी को लेकर होगी। ये दोनों नेता चाहें तो तेजस्वी यादव की सरकार बना सकते हैं और नीतीश कुमार की सरकार गिरा सकते हैं। हालांकि मुकेश सहनी और जीतनराम मांझी का भविष्य में क्या रुख रहेगा अभी इसे लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकि दोनों नेता गठबंधन से भीतर और बाहर होते रहते हैं। यह नहीं भूलना चाहिए कि एनडीए में इस समय एक निर्दलीय विधायक भी है।
तेजस्वी यादव के लिए आसान नहीं होगा सरकार बनाना
अगर एनडीए में सिर्फ बीजेपी और जेडीयू भी रह जाते हैं तो भी एनडीए के पास 115 विधायक होंगे। यानी नीतीश सरकार गिराकर तेजस्वी यादव के लिए सरकार बनाना भी इतना आसान नहीं होगा। ऐसे में मध्यावधि चुनाव की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
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