गोरखपुर मंडल में पर्यटन विकास को मिलेगी नई रफ्तार, 77 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की हुई समीक्षा

0
0
AI प्रतीकात्मक तस्वीर
AI प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश सरकार गोरखपुर मंडल को पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से नई पहचान देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना के तहत गोरखपुर मंडल की पर्यटन, संस्कृति और धर्मार्थ परियोजनाओं की दो दिवसीय समीक्षा और स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान पर्यटन विभाग की करीब 77 करोड़ रुपये लागत वाली 30 परियोजनाओं के साथ धर्मार्थ कार्य विभाग की तीन और सांस्कृतिक विभाग की तीन योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।

गुणवत्ता और समयसीमा पर विशेष जोर

अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने गोरखा युद्ध स्मारक, गौरव संग्रहालय, परमहंस योगानंद की जन्मस्थली और बुद्ध संग्रहालय सहित कई परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं। साथ ही परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया।

गौरव संग्रहालय और गोरखा युद्ध स्मारक बनेंगे आकर्षण का केंद्र

समीक्षा के दौरान गोरखपुर में विकसित हो रहे गौरव संग्रहालय और गोरखा युद्ध स्मारक को प्रमुख परियोजनाओं के रूप में चिन्हित किया गया। लक्ष्य है कि इन दोनों परियोजनाओं को दिसंबर तक पूरा कर लिया जाए। गौरव संग्रहालय में वैदिक काल से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक के इतिहास को आधुनिक गैलरियों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा, जबकि गोरखा युद्ध स्मारक में गोरखा सैनिकों के शौर्य और भारतीय सेना में उनके योगदान को डिजिटल तकनीक और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।

बौद्ध पर्यटन और धार्मिक स्थलों के विकास पर फोकस

सरकार की योजना के तहत कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज के धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विपश्यना केंद्र, बुद्ध गमन मार्ग के विभिन्न पड़ावों का विकास, कपिलवस्तु में आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का विस्तार और महराजगंज के देवदह क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की गई।

इसके अलावा कसया, बड़हलगंज और पडरौना के ऐतिहासिक रामलीला मैदानों के विकास और सौंदर्यीकरण की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना और प्रदेश के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है।