योगी सरकार की ‘नेचुरल बायो-इकोनॉमी मॉडल’ से बदल रही वनवासी महिलाओं की जिंदगी, हर्बल साबुन बनाकर हो रहीं आत्मनिर्भर

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UP News: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण और वनवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में ‘नेचुरल बायो-इकोनॉमी मॉडल’ नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने की पहल अब वन क्षेत्रों की महिलाओं के लिए रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के सहयोग से महिलाएं बकरी के दूध और औषधीय पौधों से हर्बल साबुन तैयार कर रही हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

‘जंगल से बाजार’ तक पहुंच रहे स्थानीय उत्पाद

सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल वन उत्पादों का उपयोग बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें बाजार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है। इसका एक सफल उदाहरण सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज विकासखंड के साजौर गांव का बजरंगबली स्वयं सहायता समूह है। यहां महिलाएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर हर्बल साबुन तैयार कर रही हैं और अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंचा रही हैं।

हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक का कारोबार

बजरंगबली स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 10 से अधिक महिलाएं नियमित रूप से उत्पादन कार्य में लगी हैं। समूह के माध्यम से हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक के हर्बल उत्पादों की बिक्री हो रही है। इससे प्रत्येक सदस्य को औसतन 8 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त मासिक आय प्राप्त हो रही है।

यह अतिरिक्त आय महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

प्राकृतिक अवयवों से तैयार हो रहे हर्बल उत्पाद

समूह द्वारा बनाए जा रहे साबुन में बकरी का दूध, नीम, एलोवेरा, हल्दी, चंदन और मोरिंगा जैसे प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाता है। इन उत्पादों को त्वचा के लिए सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प के रूप में पहचान मिल रही है। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण इनकी बाजार में अच्छी स्वीकार्यता भी देखने को मिल रही है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिला संबल

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे महिलाएं केवल उत्पाद निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यवसाय संचालन और बाजार प्रबंधन की भी जानकारी हासिल कर रही हैं।

सरकार का लक्ष्य गांवों में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। सोनभद्र की यह पहल इसी दिशा में एक सफल उदाहरण के रूप में उभर रही है, जो अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।