‘धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही भाजपा…’, शंकराचार्य से मुलाकात के बाद राम मंदिर से कानून-व्यवस्था तक अखिलेश का BJP पर हमला

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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक विमर्श एक बार फिर केंद्र में आ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस छिड़ गई है। इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने भाजपा पर कई मोर्चों पर हमला बोला और धार्मिक, राजनीतिक तथा प्रशासनिक मुद्दों को एक साथ जोड़ते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी अब भाजपा को केवल सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि सनातन और धार्मिक विमर्श के जरिए भी चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।

सनातन और गौ संरक्षण को लेकर भाजपा पर निशाना

शंकराचार्य से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि गौ संरक्षण और सनातन परंपराओं को लेकर समाज में चिंता का माहौल है। उन्होंने दावा किया कि शंकराचार्य ने भी गौ माता और सनातन मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म को आस्था के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनका कहना था कि सरकार की प्राथमिकताएं समय-समय पर चुनावी समीकरणों के अनुसार बदलती रहती हैं और धार्मिक मुद्दों का उपयोग केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए किया जाता है।

राम मंदिर विवाद और एसआईटी जांच पर उठाए सवाल

अखिलेश यादव ने हाल के विवादों का उल्लेख करते हुए राम मंदिर परिसर से जुड़े मामलों की जांच पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि पूरे प्रकरण में शामिल लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) निष्पक्षता से काम नहीं कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह विवाद केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक कारण हो सकते हैं।

लोकतंत्र और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल

प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने राज्य की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ तेजी से मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, जबकि विपक्ष की शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और सत्ता का उपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सत्ता स्थायी नहीं होती और राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं।

‘पूरा ढांचा बदलने’ का दिया संदेश

महंगाई, प्रशासनिक चुनौतियों और जनहित के मुद्दों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि अब केवल बदलाव की बात नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी आगामी राजनीतिक अभियान में इसी मुद्दे को प्रमुखता से जनता के बीच ले जाएगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में धार्मिक और वैचारिक मुद्दों को लेकर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है। शंकराचार्य से मुलाकात और उसके बाद दिए गए बयान इसी बदलती चुनावी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।