Hormuz Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव, भारतीय जहाजों पर फायरिंग से हालात गंभीर; भारत ने ईरान से जताई कड़ी नाराजगी

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

Hormuz Crisis: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब एक नए खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में ईरानी नौसेना द्वारा दो भारतीय जहाजों समेत तीन जहाजों पर गोलीबारी किए जाने की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

सूत्रों के अनुसार, ईरानी नौसेना ने इन जहाजों को चेतावनी देते हुए पश्चिम दिशा की ओर लौटने के लिए मजबूर किया। घटना के बाद दोनों भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से वापस लौट गए हैं। राहत की बात यह है कि किसी भी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा और सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

भारत के लिए क्यों गंभीर है मामला?

इस घटना का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। जानकारी के मुताबिक, प्रभावित जहाजों में से एक इराक से करीब 20 लाख टन तेल लेकर भारत की ओर आ रहा था। ऐसे में इस मार्ग में बाधा भारत के लिए चिंता का विषय बन गई है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत कूटनीतिक कदम उठाए। विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली (Dr. Mohammad Fattahali) को तलब कर इस घटना पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की।

15 भारतीय जहाज अब भी फंसे

बताया जा रहा है कि होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में अभी भी करीब 15 भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। वर्तमान स्थिति बेहद जटिल है—एक ओर ईरानी नौसेना जहाजों को बाहर निकलने से रोक रही है, तो दूसरी ओर अमेरिकी सेना की नाकेबंदी ने पूरे क्षेत्र को घेर रखा है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों तथा जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ईरान बनाम अमेरिका: तनाव चरम पर

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव मुख्य कारण है। ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की घोषणा कर दी है।

ईरान का कहना है कि जब तक उसके बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंध और नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक वह इस अहम समुद्री मार्ग को खुला नहीं रखेगा।

दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान अमेरिकी शर्तों को नहीं मानता, तब तक दबाव और नाकेबंदी जारी रहेगी।

वार्ता की कोशिशें, लेकिन अनिश्चितता कायम

इस बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि ईरान ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका का रुख बेहद सख्त है, इसलिए तत्काल किसी समझौते की संभावना कम है।

ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को नहीं सौंपेगा, जिससे परमाणु मुद्दे पर टकराव और गहरा सकता है।

वैश्विक असर की आशंका

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लगभग 20% तेल आपूर्ति का मार्ग है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है, जहां ऊर्जा सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती है।