
Srinagar ASI Martyred: जम्मू- कश्मीर के श्रीनगर में मंगलवार को हुए आतंकी हमले में एक पुलिसकर्मी शहीद हो गए। एएसआई मुश्ताक अहमद परिवार के साथ ईद मनाकर सोमवार को ही घर से निकले थे। श्रीनगर के लाल बाजार पर ड्यूटी कर रहे तीन पुलिसकर्मियों पर आतंकियों ने हमला किया। आतंकी फायरिंग में दो जवान गंभीर रूप से घायल हैं, वहीं एएसआई मुश्ताक अहमद शहीद हो गए।
शहीद होने की खबर मिलते ही परिवार का रो- रो कर बुरा हाल है। परिवार के साथ- साथ इस खबर से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ हैं। इस घटना के कुछ समय बाद आतंकी संगठन, ISIS ने अपनी मीडिया सेना AMAQ के माध्यम से हमले की जिम्मेदारी ली।

Srinagar ASI Martyred: पार्थिव शरीर को देख परिवार की हिम्मत टूटी
श्रीनगर के आतंकी हमले में शहीद हुए मुश्ताक अहमद अपने परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में बूढ़ी मां, पत्नी, बेटा और दो बेटियां हैं जो अब बेसहारा हो चुके हैं। उनकी दोनों बेटियों का रो- रो कर बुरा हाल है। मुश्ताक के यूं अचानक परिवार का साथ छोड़ जाने का सदमा परिवार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। उनकी बेटियों की नम आंखों में यही सवाल है कि क्या उनके पिता और उनके परिवार को एक कश्मीरी होने की सजा मिली है। आखिर क्यों वो इस क्रूर हिंसा का शिकार होते हैं। ऐसे कई सवाल है जो न सिर्फ मुश्ताक के परिवार वालों के जहन में हैं, बल्कि हर कश्मीरी के मन में हैं।

Srinagar ASI Martyred: आतंकियों ने कैसे इस हत्या को अंजाम दिया?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिसकर्मी हमले से बचने के लिए वहां मौजूद चिनार के पीछे छिपने के लिए भागे, दूसरा हमलावर पीछे की ओर से आया और पेड़ के पीछे खड़े पुलिसकर्मी को अपना निशाना बनाया। इसके बाद पीछे वाहन में मौजूद पुलिसकर्मियों पर खिड़की के शीशे तोड़कर हमला किया, जिसमें एएसआई मुश्ताक की मौत हो गई।

आतंकवादियों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाया था। उन्होंने AK-47 की तस्वीर के साथ वीडियो जारी किया था। ISIS ने पुलिसकर्मियों से AK-47 छीनने का दावा किया था। आतंकियों द्वारा जारी किए गए वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे पूरे ग्रुप के 2-3 आतंकियों ने पिस्तौल और एके-47 राइफल से इस हत्या को अंजाम दिया है। हमलावर दोनों तरफ से आए थे।
Srinagar ASI Martyred: दो साल पहले ही आतंकी बेटे को मारा गया था
साल 2020 में मुश्ताक अहमद का सबसे छोटा बेटा घर से लापता हो गया था और आतंकी संगठन में शामिल हो गया। आकिब मुश्ताक अवंतीपुर की इस्लामिक यूनिवर्सिटी से B-Tech की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन उसने सच्चाई का रास्ता छोड़ आतंकियों का हाथ थाम लिया था। पिता मुश्ताक ने अपने जीवनकाल में बेटे आकिब को हिंसा का रास्ता छोड़ वापस लाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो असफल रहे।

आकिब को कुलगाम के गुड्दुर गांव में हिजबुल मुजाहिद्दीन के तीन स्थानीय आतंकवादियों के साथ मार गिराया गया था। आतंकवादियों के शव परिवारों को नहीं सौंपने का फैसला करने के बाद पुलिस द्वारा उन्हें उरी में उग्रवादी कब्रिस्तान में दफनाया गया था। आतंकी बेटे की मौत के दो साल बाद अब पिता खुद आतंकियों की गोली शिकार हो गए।
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