पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ समाजवादी नेता Sharad Yadav ने रविवार को अपनी पार्टी, लोकतांत्रिक जनता दल (LJD) का विलय लालू प्रसाद के नेतृत्व वाली RJD में कर लिया है। जिसके बाद जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव, राजद में शामिल हो गए हैं।
अपनी पार्टी का विलय राजद में करने के बाद यादव ने कहा कि विपक्ष को एक करने की दिशा में यह पहला कदम है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि बीजेपी को हराने के लिए पूरे देश में पूरा विपक्ष एकजुट हो जाए। अभी साथ आना हमारी प्राथमिकता है, बाद में हम इस बारे में सोचेंगे कि एकजुट विपक्ष का नेतृत्व कौन करेगा?
RJD भेजगी Sharad Yadav को राज्यसभा

हाल ही में लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव और राजद के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने शरद यादव से नई दिल्ली में उनके घर पर मुलाकात की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तेजस्वी ने शरद यादव को RJD का राज्यसभा उम्मीदवार बनाने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि जून में राज्यसभा का चुनाव होना है। जिसमें उच्च सदन की पांच सीटें भाजपा और राजद द्वारा दो-दो और जदयू के एक सदस्य को भेजने से भरी जाएंगी।
कई बार सांसद रहे हैं Sharad Yadav

शरद यादव सात बार लोकसभा के और तीन बार राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। साथ ही मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। बता दें कि 1997 में जनता दल अध्यक्ष के चुनाव में लालू प्रसाद और शरद के बीच प्रतियोगिता के कारण, उनको पार्टी से बाहर कर दिया गया था। गौरतलब है कि वो नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पहले अध्यक्ष थे।
2018 में बनाई थी एलजेडी

2017 में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) के एक साथ आने के बाद वो JDU से अलग हो गए थे। जिसके बाद मई 2018 में शरद यादव ने लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) बनाई थी। वहीं 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी बेटी सुभाषिनी राज राव ने मधेपुरा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। जिसमें उनकी हार हुई थी।
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