Punjab News: गुरबाणी की गूंज से हमेशा सराबोर रहने वाला अमृतसर फिर हिंसा की आग में धधकने लगा है।सरबत दा भला चाहने वाली गुरबाणी की जगह आजकल यहां अलग खालिस्तान की मांग जोर पकड़ रही है।अपने एक साथी लवप्रीत तूफान की रिहाई को लेकर पूरा बवाल हुआ है,जोकि पुलिस की गिरफ्त में है।इसे छुड़ाने के लिए “वारिस पंजाब दे” नामक संगठन के मुखिया अमृतपाल सिंह ने जिस हिंसक तरीके से प्रशासन को घुटने टेकने पर मजबूर किया है, वह आने वाले बड़े खतरे का अलार्म है।
पंजाब में अमृतपाल सिंह के करीबी लवप्रीत तूफान को आखिरकार जेल से रिहा कर दिया गया है।मालूम को कि उसके पुलिस हिरासत में जाने के बाद से राज्य में हालात बिगड़ गए थे। उसकी गिरफ़्तारी से नाराज उसके समर्थक भड़क गए और उन्होंने थाने का ही घेराव कर दिया।
राज्य की सुरक्षा का दायित्व का जिम्मा बेशक राज्य सरकार के पास हो, लेकिन केंद्र सरकार को इसे हल्के में नहीं लेना होगा।90 के दशक की शुरुआत में पंजाब से आतंकवाद का पूरी तरह से सफाया हो जाने के बाद ये पहली ऐसी घटना है।
जिसमें खालिस्तान की आवाज उठाने वाले हजारों समर्थकों ने तलवारों और बंदूकें उठाकर न सिर्फ पुलिस थाने का घेराव किया, बल्कि 6 पुलिसकर्मियों को जख्मी भी कर दिया।पूरे बवाल को शांत करने के लिए पुलिस को ये आश्वासन देना पड़ा कि अमृत पाल के साथी को कल रिहा कर दिया जाएगा।

Punjab News: जानिए कौन है अमृतपाल सिंह?
Punjab News: खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरावाले की विचारधारा को फॉलो करते हुए अमृतपाल सिंह सरकार के लिए बड़ा खतरा बनने जा रहा है।पंजाब के जल्लूपुर खेड़ा गांव के एक साधारण सिख परिवार में जन्मा अमृतपाल करीब 10 वर्ष पूर्व कामकाज के सिलसिले में दुबई गया था।पिछले वर्ष वहां से घर वापसी के साथ ही उसने सबसे पहले ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन की कमान संभाली। जिसका गठन पंजाबी अभिनेता और किसान आंदोलन में बड़ा चेहरा बनकर उभरे संदीप सिंह उर्फ दीप सिद्धू ने किया था।
ये वही सिद्धू था जिसने किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी 2021 को अन्य किसानों के साथ लाल किला में घुसपैठ कर ली थी। उसकी प्राचीर पर खालसा पंथ का निशान साहिब (झंडा) लगाने की कोशिश की थी। मालूम हो कि दीप सिद्धू की बीते साल 15 फरवरी को हरियाणा के सोनीपत में दिल्ली से पंजाब जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।
जानकारी के अनुसार इसी संगठन की कमान संभालते ही खालिस्तान की आवाज को मजबूत करना शुरू कर दिया।पिछले साल अक्टूबर में पंजाब के विभिन्न शहरों में सरकारी दफ्तरों के बाहर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिखने से इसकी शुरुआत हुई। उसने सरकार के खिलाफ भड़काऊ बयान देकर एक कट्टरपंथी नेता के रुप में अपनी पहचान बना ली।इसका मकसद इलाके के अधिक से अधिक युवाओं को आंदोलन के साथ जोड़ना था।
जानकारी के अनुसार वह सिख धर्म के प्रसार के लिए अमृत संचार अभियान चलाता है। बीते दिनों अमृतसर में भी उसने एक और बड़ा अमृत प्रचार अभियान चलाया था, जिसमें 1,027 सिखों और हिंदुओं ने अमृतपान किया और वे खालसा सिख बने थे।
सिख धर्म में अमृतपान को सबसे पवित्र माना जाता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि 80 के दशक के शुरुआती दौर में भिंडरावाले ने भी ऐसे ही अमृत पान की आड़ में कब सैकड़ों नौजवानों के हाथों में बंदूकें थमा दी थीं। इसकी जानकारी जून 1984 में हुए आपरेशन ब्लू स्टार के बाद ही पता लगी।इस दौरान स्वर्ण मंदिर को उग्रवादियों से मुक्त करवाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वहां सेना भेजनी पड़ी। जिसकी कीमत उन्हें 4 माह बाद ही अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी।

Punjab News: केंद्रीय गृह मंत्री को दी धमकी
Punjab News: हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को परोक्ष रूप से धमकी भी दी थी।19 फरवरी को पंजाब के मोगा जिले के बुद्धसिंह वाला गांव में उसने इसी तरह का संकेत दिया था। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक अमृतपाल सिंह ने तब अपने बयान में कहा था, “अमित शाह ने कहा था कि खालिस्तान आंदोलन को नहीं बढ़ने देंगे. तब मैंने जवाब दिया था कि इंदिरा गांधी ने भी ऐसा ही किया था। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको नतीजे भुगतने होंगे।
अगर गृह मंत्री ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग करने वालों से यही कहते हैं तो मैं देखूंगा कि क्या वह एचएम बने रहते हैं।” हालांकि उसकी दलील ये भी है कि हम खालिस्तान के मामले को बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं।जब लोग हिंदू राष्ट्र की मांग कर सकते हैं तो हम खालिस्तान की मांग क्यों नहीं कर सकते। हमें कोई नहीं रोक सकता, चाहे वह पीएम मोदी हों, अमित शाह हों या भगवंत मान। मुझ पर और मेरे समर्थकों पर लगाए गए आरोप झूठे हैं।
डिस्क्लेमर- रिपोर्ट में दीं गईं समस्त जानकारियां विभिन्न समाचार स्तोत्रों से लीं गईं हैं, इनका एपीएन चैनल से लेनादेना नहीं है।
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