पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के चुनाव नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई रणनीतियों का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) अब ब्राह्मण वोटरों के साथ-साथ क्षत्रिय समाज को भी साधने की कोशिश में जुटे नजर आ रहे हैं।
शनिवार को लखनऊ में महाराणा प्रताप जयंती कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख ने क्षत्रिय समाज को लेकर कई बड़े राजनीतिक संकेत दिए। अखिलेश यादव ने कहा कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो क्षत्रिय समाज को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उन्होंने टिकट वितरण में भी पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया।
सपा प्रमुख ने इस दौरान महाराणा प्रताप जयंती पर दो दिन का सरकारी अवकाश घोषित करने का वादा भी किया। साथ ही उन्होंने कहा कि गोमती रिवरफ्रंट पर महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
राजनीतिक जानकार इसे समाजवादी पार्टी की नई सामाजिक समीकरण रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि 2027 विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सपा अब पारंपरिक वोट बैंक के साथ अन्य प्रभावशाली वर्गों को भी जोड़ने की कोशिश कर रही है।
कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में “बहुस्तरीय चुनावी माफिया” सक्रिय हैं और लोकतंत्र व संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।
ईवीएम को लेकर भी सपा प्रमुख ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब स्मार्ट मीटर में गड़बड़ी हो सकती है, तो ईवीएम पर सवाल उठाना गलत नहीं है। उन्होंने अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई।









