Mumbai Court News: बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि टायर का फटना ‘एक्ट ऑफ गॉड’ नहीं है बल्कि मानवीय लापरवाही का कार्य है। इस फैसले के साथ ही अदालत ने बीमा कंपनी को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। बता दें कि टायर फटने के बाद एक कार कुछ दिन पहले दुर्घनाग्रस्त हो गई थी। इसमें कार सवार की मौत हो गई। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने यह कहते हुए मुआवजे का भुगतान करने से इनकार कर दिया कि दुर्घटना एक्ट ऑफ गॉड के तहत हुआ है।
Mumbai Court News: 2010 का है मामला ?
रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना 25 अक्टूबर, 2010 को हुई थी। पटवर्धन (38) अपने दो सहयोगियों के साथ एक समारोह में भाग लेने के लिए पुणे से मुंबई जा रहे थे।” तभी पिछला पहिया फट गया और कार गहरी खाई में गिर गई, जिससे पटवर्धन की मौके पर ही मौत हो गई। पटवर्धन परिवार में एकमात्र कमाने वाला था और अपने पीछे पत्नी (34), बेटी (7), पिता (70) और मां (65) को छोड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, वह एक निजी कंपनी में सहायक प्रबंधक थे और उनकी मृत्यु के समय लगभग 69,000 रुपये का वेतन प्राप्त हुआ था।

बीमा कंपनी को मुआवजा देने का आदेश
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, पुणे ने बीमा कंपनी को मकरंद पटवर्धन के परिवार को 9% ब्याज के साथ लगभग 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था।हालांकि, बीमा कंपनी ने ट्रिब्यूनल के 7 जून, 2016 के आदेश को उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती देते हुए कहा कि ट्रिब्यूनल ने अत्यधिक मुआवजे का आदेश दिया है। हालांकि, बंबई उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एस जी डिगे ने कहा कि ‘एक्ट ऑफ गॉड’ प्राक्रितिक शक्तियों का एक उदाहरण है। “यह उस घटना को संदर्भित करता है जिसके लिए कोई भी मानव जिम्मेदार नहीं है। टायर के फटने को ईश्वर का कार्य नहीं कहा जा सकता है। यह मानवीय लापरवाही का कार्य है। इसलिए बीमा कंपनी पीड़ित के परिजनों को मुआवजा दें।
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