अनिल अंबानी समूह की कथित बैंक धोखाधड़ी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI–ED से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

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अनिल धीरूभाई अंबानी समूह से जुड़ी कथित बैंक धोखाधड़ी के मामलों में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने जांच की प्रगति को लेकर सीबीआई (Central Bureau of Investigation (CBI)) और प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate (ED)) से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच पूरी न हो पाई हो, तब भी एजेंसियां अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष दाखिल करें।

जनहित याचिका पर सुनवाई

यह आदेश पूर्व केंद्रीय सचिव ई.ए.एस. सरमा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ कर रही है। याचिका में आरोप है कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों से जुड़े बैंकिंग लेन-देन में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं और मौजूदा जांच का दायरा सीमित रखा गया है।

सीलबंद कवर में रिपोर्ट का निर्देश

खंडपीठ ने कहा कि जांच की स्थिति चाहे जो भी हो, एजेंसियां अद्यतन जानकारी अदालत को उपलब्ध कराएं। यदि जांच प्रक्रिया अधूरी है, तो भी सीलबंद कवर में रिपोर्ट दाखिल की जाए, ताकि न्यायालय जांच की दिशा और गति का आकलन कर सके।

RCOM से जुड़े मामलों की कोर्ट-निगरानी जांच की मांग

याचिका में विशेष रूप से RCOM समूह की कंपनियों और प्रमोटर अनिल अंबानी (Anil Ambani) से जुड़े कथित बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों का उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इन मामलों की कोर्ट-निगरानी में व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

जांच के दायरे पर सवाल

याचिका में यह तर्क रखा गया कि CBI द्वारा अगस्त 2025 में दर्ज की गई FIR और ED की कार्रवाइयां कथित तौर पर कुछ चुनिंदा मामलों तक सीमित हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि कथित तौर पर लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और लेन-देन की परतें खोलने में विफल रही हैं।

कर्ज राइट-ऑफ और शेल कंपनियों के आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि अनिल अंबानी समूह की कंपनियों का 1.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बैंकों द्वारा राइट-ऑफ किया गया। साथ ही, शेल कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर धन की हेराफेरी की आशंका जताई गई है। इसे देश के सबसे बड़े बैंक लोन घोटालों में से एक बताया गया है।

बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

याचिकाकर्ता ने बैंकों द्वारा FIR दर्ज करने में लगभग पांच साल की देरी का हवाला देते हुए बैंक अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो कथित नुकसान को रोका जा सकता था।

अंतिम अवसर

अदालत ने संकेत दिए हैं कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों को अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया जाएगा। आने वाली सुनवाई में एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और निर्देश तय किए जा सकते हैं।