Manipur Violence: पिछले 56 दिनों से जल रहे मणिपुर में अब तक 110 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लगभग 3000 से ज्यादा लोग जख्मी हो चुके हैं। शांति की उम्मीद कर रहे मणिपुर से जुड़ी एक बेहद अहम खबर सामने आई है।सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि राज्य में शांति बहाल करना बेहद जरूरी है। हम इस मामले को ज्यादा टाल नहीं सकते। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने राज्य से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। जिसमें राज्य सरकार को तमाम तरह के सवालों का जवाब भी देना होगा।
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Manipur Violence: स्टेटस रिपोर्ट में मांगी ये जानकारियां
Manipur Violence: लगभग पिछले 2 महीने से नफरत और हिंसा से झुलस रहे मणिपुर में हालात सामान्य करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। इस रिपोर्ट में राज्य सरकार को ये बताना होगा कि आखिर पिछले कई दिनों से हो रही हिंसा को काबू करने के लिए सरकार ने क्या मजबूत कदम उठाए ?इसके साथ ही कितने राहत कैंप बनाए गए हैं ? अब तक कितने हथियार बरामद किए गए हैं ? इस तरह की जानकारी भी उस रिपोर्ट में सम्मिलित करनी जरूरी है। गौरतलब है कि इस रिपोर्ट को जमा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को अगली सुनवाई यानी 10 जुलाई तक का समय दिया है।
Manipur Violence: हिंसा में नहीं हो रही कमी- याचिकाकर्ता
Manipur Violence: मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मणिपुर में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल भी तैनात किया गया है, लेकिन तुषार मेहता की बात को गलत बताते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा कि, ‘पिछले कई दिनों से हिंसा में कोई कमी नहीं हो रही है। अब तक 110 लोग मारे जा चुके हैं। इसीलिए वहां के ताजा हालात स्पष्ट करते हुए हमने एक अर्जी दाखिल की है।
Manipur Violence: क्या है पूरा मामला ?
Manipur Violence: मणिपुर में बीते 3 मई को चुरचांदपुर के तोरबंग इलाके से कुकी समुदाय ने ‘आदिवासी एकता मार्च’ यात्रा निकाली थी।इसी यात्रा के दौरान ही हिंसा भड़क उठी। एकता मार्च के दौरान आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। तब से ही मणिपुर में हालत तनावपूर्ण बने हुए हैं।
आपको बता दें कि, ये समुदाय कुकी और मैतेई है। वहीं, 3 मई के शाम तक मणिपुर के हालात इतने बिगड़ गए कि राज्य सरकार को केंद्र सरकार से मदद मांगनी पड़ी और फिर वहां सेना और पैरामिलिट्री को तैनात करना पड़ा।
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