Maharashtra politics: महाराष्ट्र की राजनीति में आज यानी गुरुवार का दिन बेहद खास रहने वाला है।सुप्रीम की संवैधानिक पीठ उद्धव ठाकरे-एकनाथ शिंदे के शिवसेना में टूट और महाराष्ट्र में सरकार बदलने को लेकर दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, कृष्ण मुरारी, हिमा कोहली और पीएस नरसिम्हा की बेंच यह फैसला सुनाएगी। सुनवाई के दौरान उद्धव कैंप ने
शिंदे की बगावत और उनकी सरकार के गठन को गैरकानूनी बताया था।
इस पूरे मामले में एक के बाद एक कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दाखिल की गईं।शिंदे गुट के 16 विधायकों ने सदस्यता रद्द करने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। दूसरी तरफ उद्धव गुट ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राज्यपाल के शिंदे को सीएम बनने का न्योता देने और फ्लोर टेस्ट कराने के फैसले के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की।

Maharashtra politics:जानिए कब क्या हुआ?
- पिछले वर्ष जून 2022 में शिवसेना में अचानक बगावत हो गई। एकनाथ शिंदे गुट के ‘बागी विधायकों’ ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर असंतोष जाहिर किया। सभी16 विधायक “लापता हो गए
- पार्टी के मुख्य सचेतक, जिन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की ओर से नामित किया गया था, उन्होंने तत्कालीन डिप्टी स्पीकर द्वारा ‘बागी’ विधायकों को नोटिस जारी करने के साथ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू कर दी
- ‘बागी विधायकों’ ने डिप्टी स्पीकर के खिलाफ ‘अविश्वास का प्रस्ताव रखने के लिए एक पत्र भेजा।प्रस्ताव यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि कर दिया गया कि इस प्रस्ताव को प्रॉपर चैनल के माध्यम से नहीं भेजा गया था
- अयोग्यता की कार्यवाही के खिलाफ बागी विधायकों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, कोर्ट की 3 जजों की पीठ ने सभी नोटिसों का जवाब देने के लिए बागियों को और अधिक समय दिया
- ‘शिंदे खेमे’ के विधायकों ने महाराष्ट्र छोड़ दिया, और अपनी जान और संपत्ति को गंभीर खतरे का आरोप लगाते हुए राज्यपाल से संपर्क किया
- उद्धव ने विश्वास मत से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया।राज्यपाल की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट चले गए
Maharashtra politics: सर्वोच्च अदालत में क्या थी उद्धव गुट की दलील?

Maharashtra Politics: उद्धव गुट की ओर से संविधान पीठ के समक्ष दायर याचिकाओं में 22 जुलाई के फ्लोर टेस्ट को रद्द करने की मांग की गई। जिसके बाद एकनाथ शिंदे को सीएम की कुर्सी मिली।उन्होंने कहा कि विधायकों को “पार्टी विरोधी गतिविधि” की तारीख से “अयोग्य माना जाएगा” और इसलिए शिंदे को सीएम नहीं बनाया जा सकता था।
इसके साथ यह भी तर्क दिया गया कि एकनाथ शिंदे की मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति “संविधान के अनुच्छेद 164 (1-बी) का उल्लंघन करती है और यह कि दल-बदल कानून के प्रावधान के किसी भी उद्देश्य के खिलाफ है, क्योंकि दल-बदल करने वालों को संवैधानिक पाप करने के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है।
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