Anil Deshmukh: वसूली मामले में पिछले एक साल से जेल में बंद महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख जेल से रिहा हो गए हैं। एक साल बाद उन्हें मंगलवार को जमानत मिल गई। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की स्टे याचिका खारिज होते ही अनिल देशमुख का जेल से निकलने का रास्ता साफ हो गया था। वहीं, जेल से बाहर निकलते ही अनिल देशमुख ने सबसे पहले अपने समर्थकों का आभार जताया और हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। अनिल देशमुख ने कहा कि उनपर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद थे। परमबीर सिंह और सचिन वाजे के आरोप झूठे थे।

Anil Deshmukh: छुट्टियां मामले की सुनवाई में बनी बाधक
मालूम हो कि सीबीआई ने देशमुख के जमानत आदेश को प्रभावी बनाने के लिए और स्टे की मांग करते हुए न्यायमूर्ति एस जी चापलगांवकर की अवकाश पीठ का दरवाजा खटखटाया था। केंद्रीय एजेंसी ने दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष किए गए सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद, छुट्टी के कारण जमानत आदेश की चुनौती में सुनवाई नहीं हो सकी। 21 दिसंबर को, उच्च न्यायालय ने देशमुख की जमानत आदेश के प्रभाव पर रोक को 27 दिसंबर तक बढ़ा दिया था। इससे पहले न्यायमूर्ति कार्णिक ने 12 दिसंबर को भ्रष्टाचार के एक मामले में देशमुख को जमानत देते हुए कहा था कि यह आदेश 10 दिनों के बाद ही प्रभावी होगा ताकि सीबीआई तब तक इसे चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सके।
क्या है मामला?
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख इस समय मुंबई के आर्थर रोड जेल में बंद थे। मुंबई के तत्कालीन पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने मार्च 2021 में तब के गृह मंत्री अनिल देशमुख पर वसूली का आरोप लगाया था। उनके पत्र ने तब महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल पैदा कर दिया था। उन्होंने अनिल देशमुख पर आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारियों को मुंबई के रेस्तरांओं और बार से हर महीने 100 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य दिया था। अनिल देशमुख पिछले साल यानी नवंबर 2021 से जेल में थे। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें कथित वसूली मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं, देशमुख ने अपने खिलाफ लगे सारे आरोपों से इनकार किया था।
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