
हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लघु अवधि के ऋण देने वाले सभी वित्तीय संस्थानों के लिए ब्याज अनुदान को बहाल कर 1.5 प्रतिशत करने की मंजूरी दे दी गयी है.
इस प्रकार 1.5 प्रतिशत का ब्याज अनुदान उधार देने वाले संस्थानों (सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक, लघु वित्त बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक और वाणिज्यिक बैंकों से सीधे तौर पर जुड़े कम्प्यूटरीकृत पीएसीएस) को किसानों को वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक 3 लाख रुपये तक के लघु अवधि के कृषि ऋण देने के लिए प्रदान किया गया है.
इस योजना के अंतर्गत ब्याज अनुदान सहायता में बढ़ोतरी के लिए 2022-23 से 2024-25 की अवधि में 34,856 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजटीय प्रावधान की जरूरत होगी.
केंद्र सरकार द्वारा पिछले चार सालों में ‘संशोधित ब्याज अनुदान योजना’ के माध्यम से जारी की गई राशि –
वित्त वर्ष | बजट अनुमान | अन्तिम अनुदान | जारी की गई राशि | |
2019-20 | 18,000.00 | 16,236.86 | 16,218.75 | |
2020-21 | 21,175.00 | 19,831.75 | 17,789.72 | |
2021-22 | 19,468.31 | 21,476.933 | 21,476.933 | |
2022-23 | 19,500.00 | 19,500.00* | 3,040.45* |
वित्तीय संस्थानों विशेषकर सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए ब्याज दर और ऋण दरों में विशेष वृद्धि की, बदलते आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने इन वित्तीय संस्थानों को प्रदान की गई ब्याज दर अनुदान की समीक्षा की है. सरकार को उम्मीद है कि इससे किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में पर्याप्त ऋण प्रवाह सुनिश्चित होगा, साथ ही ऋण देने वाले संस्थानों की वित्तीय स्थिति में भी सुधार सुनिश्चित होगा.
क्या होंगे लाभ?
ब्याज अनुदान में वृद्धि से कृषि क्षेत्र में ऋण के प्रवाह की स्थिरता सुनिश्चित होने के साथ ऋण देने वाले संस्थानों विशेष रूप से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक एवं सहकारी बैंक की वित्तीय स्थिति और व्यवहार्यता सुनिश्चित होगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पर्याप्त कृषि ऋण सुनिश्चित होगा.
बैंक फंड की लागत में वृद्धि को समाहित करने में सक्षम होंगे और किसानों को उनकी कृषि आवश्यकताओं के लिए ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करेंगे जिससे अधिक से अधिक किसानों को कृषि ऋण का लाभ मिल सकेगा.
योजना से रोजगार सृजन में मदद मिलेगी, क्योंकि लघु अवधि के कृषि ऋण पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन सहित सभी कार्यों के लिए प्रदान किए जाते हैं.
योजना के माध्यम से किसान अगर समय पर ऋण चुकाता है तो उन्हें 4 प्रतिशत सालाना की ब्याज दर पर अल्पकालीन कृषि ऋण मिलता रहेगा.
किसानों को सस्ती दर पर लोन?
किसानों को सस्ती दर पर बिना किसी बाधा के ऋण उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार द्वारा किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की गई थी. योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को किसी भी समय ऋण पर कृषि उत्पादों और सेवाओं को खरीदने के लिए सशक्त बनाना है.
इस बात को सुनिश्चित करने के लिए कि किसान बैंक को न्यूनतम ब्याज दर का भुगतान कर सके, इसके लिए भारत सरकार ने ब्याज अनुदान योजना (Interest Subvention Scheme) शुरू की, जिसका नाम बदलकर अब संशोधित ब्याज अनुदान योजना (Modified Interest Subvention Scheme) कर दिया गया है, ताकि कम ब्याज दरों पर किसानों को लघु अवधि के ऋण प्रदान किए जा सकें.
इस योजना के तहत कृषि और अन्य संबद्ध गतिविधियों- पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन आदि में लगे किसानों के लिए 7 प्रतिशत की सालाना दर से 3 लाख रुपये तक का अल्पकालिक कृषि ऋण (Short Term Agriculture Loan) उपलब्ध है. शीघ्र और समय पर ऋण की अदायगी के लिए किसानों को अतिरिक्त 3 प्रतिशत अनुदान (शीघ्र अदायगी प्रोत्साहन – Prompt Repayment Initiative) भी दिया जाता है. अतः यदि कोई किसान अपना ऋण समय पर चुकाता है, उसे 4 प्रतिशत सालाना की दर से ऋण मिलता है.
किसानों को मिलने वाली ब्याज में छूट के लिए भारत सरकार इस योजना की पेशकश करते हुए वित्तीय संस्थानों को ब्याज अनुदान (आईएस) प्रदान करती है. यह सहायता केंद्र द्वारा 100 प्रतिशत वित्त पोषित है. यह बजट व्यय और लाभान्वितों को शामिल करने के अनुसार कृषि एवं कल्याण विभाग की दूसरी सबसे बड़ी योजना भी है.
किसान क्रेडिट कार्ड
देभभर में किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत वर्ष 1998 में की गई थी.
किसान क्रेडिट कार्ड का मुख्य उद्देश्य किसानों की ऋण आवश्यकताओं (कृषि संबंधी खर्चों) की पूर्ति के लिये पर्याप्त एवं समय पर ऋण की सुविधा प्रदान करना, साथ ही आकस्मिक खर्चों के अलावा सहायक कार्यकलापों से संबंधित खर्चों की पूर्ति करना है.
ऋण देने की ये सुविधा एक सरल कार्यविधि के माध्यम से यथा-आवश्यकता के आधार पर प्रदान की जाती है.
वर्ष 2004 में इस योजना को किसानों की निवेश ऋण आवश्यकता जैसे संबद्ध और गैर-कृषि गतिविधियों के लिये बढ़ा दिया गया था.
2018-19 के आम बजट में केंद्र सरकार ने मत्स्य पालन और पशुपालन किसानों को उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में मदद के लिये किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की सुविधा के विस्तार की घोषणा की थी.
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में, आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत, किसानों को 3.13 करोड़ से अधिक नये किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी किये गये हैं. पीएम-किसान योजना के तहत नामांकित किसानों के लिए संतृप्ति अभियान जैसी विशेष पहल ने भी प्रक्रिया और दस्तावेज को सरल बनाया है.
वो गतिविधयां जिनके लिए मिलता है किसान क्रेडिट कार्ड के तहत ऋण-
(i) फसलों की खेती के लिए अल्पकालिक ऋण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए;
(ii) बुआई के बाद के खर्च;
(iii) उपज विपणन ऋण;
(iv) किसान परिवार की खपत की आवश्यकताएं;
(v) कृषि संपत्ति और कृषि से संबद्ध गतिविधियों के रख-रखाव के लिए कार्यशील पूंजी;
(vi) कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए निवेश ऋण की आवश्यकता.
कार्यान्वयन करने वाली एजेंसियां
लघु वित्त बैंक
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (Regional Rural Banks)
सहकारी बैंक और समितियां
कम्प्यूटरीकृत पीएसीएस (Computerised PACS)