फिल्मी दुनिया से समाजसेवा तक: सरदार सिंह सूरी की पुण्यतिथि पर याद आई एक प्रेरक शख्सियत

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फिल्म निर्माता और समाजसेवी सरदार सिंह सूरी की 7वीं पुण्यतिथि पर मुंबई के चार बंगला गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा, सेवा और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन, अरदास और विशाल लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 7,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

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फिल्मी दुनिया में खास पहचान

सरदार सिंह सूरी का नाम भारतीय फिल्म जगत में भी सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने पंजाबी फिल्म “एह धरती पंजाब दी” का निर्माण किया, जो अपने समय की चर्चित और सफल फिल्मों में से एक रही। इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि कई कलाकारों को पहचान भी दिलाई।

फिल्म में प्रेम चोपड़ा, जबीन जलील, निम्मी और मदन पुरी जैसे कलाकारों ने अभिनय किया, जबकि मोहम्मद रफ़ी और महेंद्र कपूर की आवाज़ ने गीतों को अमर बना दिया। फिल्म को कई पुरस्कार भी मिले, जो इसकी सफलता और प्रभाव का प्रमाण हैं। हालांकि, व्यावसायिक विवादों के कारण सूरी साहब को इसका आर्थिक लाभ नहीं मिल सका, जिससे उनके जीवन में संघर्ष का दौर शुरू हुआ।

संघर्षों से भरा जीवन, लेकिन हौसला बुलंद

रावलपिंडी से विस्थापन के बाद अंबाला और फिर मुंबई तक का सफर आसान नहीं था। उन्होंने टैक्सी ड्राइवर के रूप में भी काम किया और फिर फिल्म निर्माण में कदम रखा। लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें दोबारा संघर्ष की राह पर ला खड़ा किया।

1967 में एक नई शुरुआत के साथ उनका जीवन समाजसेवा की ओर मुड़ गया। यह वही मोड़ था, जिसने उन्हें एक साधारण इंसान से असाधारण व्यक्तित्व बना दिया।

गुरुद्वारे से शुरू हुई सेवा की मिसाल

सूरी साहब ने एक छोटे से 10×10 ढांचे से गुरुद्वारे की शुरुआत की, जो आज हजारों लोगों के लिए सहारा बन चुका है। यहां प्रतिदिन लगभग 2,000 लोगों को लंगर परोसा जाता है, जबकि रविवार को यह संख्या 5,000 से अधिक हो जाती है।

इसके अलावा, 600 से अधिक जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा का अवसर दिया जा रहा है और 200-300 छात्रों को निशुल्क पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है। खास बात यह है कि यहां सभी धर्मों के बच्चों को समान अवसर मिलता है।

हर संकट में आगे रही सेवा

कोरोना काल में रोजाना 10,000 से 15,000 लोगों तक भोजन पहुंचाना हो या प्राकृतिक आपदाओं में राहत कार्य—इस गुरुद्वारे ने हर स्थिति में समाज के लिए मिसाल कायम की है।

विरासत को आगे बढ़ा रहा परिवार

2019 में उनके निधन के बाद उनके पुत्र जसपाल सिंह सूरी और मनिंदर सिंह सूरी इस सेवा कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। हर साल उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम अब एक परंपरा बन चुका है, जो सेवा और मानवता का संदेश देता है।

एक प्रेरणा, जो हमेशा जीवित रहेगी

सरदार सिंह सूरी का जीवन यह सिखाता है कि संघर्ष चाहे जितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर उद्देश्य सेवा और मानवता हो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। उन्होंने फिल्मी दुनिया में प्रतिभाओं को मंच दिया और समाज को सेवा का एक मजबूत आधार।

आज उनकी पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब यही दर्शाता है कि कुछ लोग भले ही दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनके विचार और कर्म हमेशा जिंदा रहते हैं।