International Women’s Day:देश के विकास में आधी आबादी का योगदान बहुत अहम है। महिलाओं के जज्बे और काम को कभी नकारा भी नहीं जा सकता है। आज शिक्षा, खेल, सुरक्षा से लेकर चिकित्सा जगत में महिलाएं एक से बढ़कर एक काम कर रहीं हैं। ऐसेे में कई महिलाएं ऐसी भी हैं जिनके जज्बे और हिम्मत के आगे न ही उनकी दिव्यांगता बाधा बनी और न ही हौंसले कमजोर हुए। दिल्ली-एनसीआर में रहने वालीं कई महिलाएं आज देशसेवा, संगीत, कला, सुरक्षा, चिकित्सा जगत और खेल के जरिये देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अपना नाम रोशन कर रहीं हैं। सलाम है इनके जज्बे और हिम्मत को।

International Women’s Day: महिला सुरक्षा को मजबूत करना मकसद- डीसीपी ईस्ट दिल्ली ईशा पांडे
महिलाएं अब चूल्हा चौके के दायरे से बाहर आकर समाज में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहीं हैं। खतरों से खेलना और देशसेवा और सुरक्षा का दायित्व भी बखूबी निभा रहीं हैं। राजधानी की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ही हर गतिविधि और पहलु को देखने का काम बखूबी निभा रहीं हैं। ईशा पांडे जिनका नाम ही काफी है। साउथ ईस्ट जिले की डीसीपी ईशा पांडे का कहना है कि महिलाएं आज किसी से कम नहीं हैं, चाहे वह कोई भी क्षेत्र क्यों न हो।
उन्होंने आईपीएस का कैडर इसलिए चुना, ताकि भीड़ से अलग होकर खुद को साबित कर सकें। उनकी तैनाती दिल्ली पुलिस की ओर से जिस जिले में की गई है, वहां संवेदनशील इलाकों के साथ ही ग्रामीण और कच्ची कॉलोनियों की तादाद भी अधिक है। बावजूद इसके वे बिना डर और दबाव के काम करने में विश्वास रखतीं हैं। इलाके में महिला सुरक्षा को लेकर खुद भी पूरी तत्परता के साथ काम करतीं हैं। फिर चाहे दिल्ली-नोएडा से सटे कालिंदी कुंज पर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ानी हो या फिर ईव टीजिंग, झपटमारी और लूट की घटनाओं को नियंत्रित करना हो।बहुत ही कम लोगों को पता होगा, कि ईशा एक पुलिस अधिकारी होने के साथ ही एक सफल लेखिका भी हैं। अभी तक उनके कई लेख, कहानियां मार्केट में आ चुकीं हैं।

International Women’s Day: राजनीति के जरिये शिक्षा का विकास करना चाहतीं हैं, आतिशी
देश और समाज सेवा के लिए कुछ अलग करने के मकसद से राजनीति में अपनी पारी की शुरुआत कर चुकीं हैं आतिशी। आतिशी मलेरना आज दिल्ली की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम है। आज कालकाजी जैसे बड़े क्षेत्र की विधायक हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में कालकाजी विधानसभा पर आम आदमी पार्टी (AAP) की उम्मीदवार आतिशी मलेरना ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी धर्मवीर सिंह को 11,393 वोटों करारी शिकस्त देकर जीत दर्ज करवाई थी। मूल रूप से दिल्ली की आतिशी आम आदमी पार्टी की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC) की सदस्य हैं। आतिशी के माता और पिता, दोनों प्रोफेसर हैं। उन्हें बचपन से पढ़ाई का वातावरण मिला।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुकीं आतिशी को दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में हुए तमाम बदलावों का श्रेय दिया जाता है।थियेटर में दिलचस्पी रखने वालीं आतिशी स्कूल से लेकर कॉलेज तक नाटकों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती रही हैं और थियेटर सोसाइटी की अध्यक्ष भी रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जगत में अभी बहुत कुछ करना बाकि है। उनकी कोशिश रहती है,कि अधिक से अधिक समय समाज और खासतौर से लड़कियों के विकास पर दें। अपने इस प्रयास को वह आगे भी जारी रखना चाहतीं हैं। वे बतातीं हैं,कि आज महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। आने वाला समय इनका ही होगा।

International Women’s Day: जिनकी आवाज ही बनी उनकी पहचान
संगीत की दुनिया में अपनी सूफियाना आवाज से पहचान बना चुकीं, रिचा शर्मा हर उम्र के लोगों की पसंदीदा गायिका हैं। बचपन से ही गाने का शौक रखने वाली रिचा को शास्त्रीय संगीत का अच्छा ज्ञान है। हरियाणा के फरीदाबाद से जुड़ी रिचा अपनी सफलता का श्रेय अपने माता,पिता को देते हुए कहतीं हैं, कि जिंदगी में हर मुकाम पाने के लिए कड़ी मेहनत जरूरी है। ये बात उनके पिता ने उन्हें सिखाई थी। घर पर धार्मिक माहौल था। पिताजी कथा वाचक थे। वे अकसर कहते थे,कि अगर तुम्हें प्लेट में बनी बनाई रोटी मिल जाएगी, तो क्या स्वाद? मजा तो तब है, जब खुद बीज बोओ, काटो, पीसो, पकाओ और फिर खाओ…हालांकि जब मैं बहुत छोटी थी। पिताजी को आभास हो गया था कि मैं एक गायिका बनूंगी। उन्होंने सबसे सामने यह बात कही थी कि मेरी बेटी संगीत में नाम कमाएगी। मैंने इस मुकाम तक पहुंचने में कठिन संघर्ष किया है। आज बॉलीवुड से लेकर भजन और शास्त्रीय संगीतमें उनका नाम ही काफी है। रिचा बतातीं हैं, कि महिला हमारी पहचान हैं, ऐसे में हर लड़की को हमेशा सच्चाई,ईमानदारी और मेहनत के दम पर अपनी प्रतिभा दिखानी होगी।

International Women’s Day: जिनके बुलंद हौसलों के आड़े नहीं आई दिव्यांगता
पैरालंपिक पदक विजेता और शॉटपुट की दुनिया में एक जाना पहचाना नाम बन चुका है दीपा मलिक। जिनके बुलंद हौसलों के आड़े उनकी दिव्यांगता कभी नहीं आई। हरियाणा के गुरुग्राम निवासी दीपा मलिक दीपा मलिक शॉटपुट एवं जेवलिन थ्रो के साथ-साथ तैराकी एवं मोटर रेसलिंग से जुड़ी एक दिव्यांग भारतीय खिलाड़ी हैं।जिन्होंने 2016 पैरालंपिक में शॉटपुट में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा। 30 की उम्र में तीन ट्यूमर सर्जरी और शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
शॉटपुट एवं ज्वलीन थ्रो में राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीते हैं, बल्कि तैराकी एवं मोटर रेसलिंग में भी कई स्पर्धाओं में हिस्सा लिया है। उन्होने भारत की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 33 स्वर्ण तथा 4 रजत पदक प्राप्त किये हैं। वे भारत की एक ऐसी पहली महिला है जिसे हिमालय कार रैली में आमंत्रित किया गया। पैरालंपिक खेलों में उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के कारण उन्हें भारत सरकार की ओर से अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनका कहना है कि महिलाओं को हर चुनौती का सामना हिम्मत के साथ करना चाहिए, इस दौरान दर्द और परेशानी होगी, लेकिन सफलता मिलने के बाद सब गायब हो जाएगा। उनका कहना है कि सकारात्मक सोच के साथ ही काम करना चाहिए।


संबंधित खबरें
- International Women’s Day 2022: ये हैं भारत की 5 सबसे ताकतवर महिलाएं…
- Women’s Day के मौके पर अपने करीबियों को दें ये तोहफा, बनाएं उनके लिए ये दिन और भी खास