International Women’s Day 2023: इंटरनेशनल वीमेन डे 8 मार्च को है।इस मौके पर आज हम आपके सामने समाज की उन महिलाओं की तस्वीर पेश करने जा रहे हैं जिनका योगदान बेहद खास है।भारतीय चिकित्सा जगत में इन महिलाओं की भूमिका इतनी खास है कि इन्होंने देश से लेकर विदेशों में भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
देश में कुछ समय पहले तक ज्यादातर व्यवसायों में पुरुषों का वर्चस्व था, लेकिन इस मिथ्या को तोड़ते हुए कुछ महिला डॉक्टर्स ने जेंडर-न्यूट्रल इंडस्ट्री बनाने में मदद मिली।
आइए जानते हैं ऐसी ही कुछ खास महिलाओं के बारे में यहां।
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International Women’s Day 2023: यूरोपियन मेडिसिन की महारथी डॉ. कादम्बिनी गांगुली
International Women’s Day 2023: ब्रिटिश भारत के दौरान एक उदार परिवार में जन्मी कादम्बिनी गांगुली देश की पहली महिला स्नातकों में से एक थीं। परंपरावादी रूढ़ियों और शादी के दायरे में आने से मना करके उन्होंने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया।साल 1886 में अपनी डिग्री अर्जित करते हुए वह दूसरी महिला भारतीय डॉक्टर बनीं, जिन्होंने वेस्टर्न मेडिकल साइंस का अभ्यास किया। उस दौरान जहां एक महिला का डॉक्टर होना लगभग असंभव था, डॉ. गांगुली ने विदेश की यात्रा की और एलआरसीपी, एलआरसीएस और जीएफपीएस डिग्री अपने नाम के साथ संलग्न करने के बाद ही घर लौटीं। अपने पुरुष समकक्षों के बीच एक बेहतर प्रतिष्ठा को देखते हुए, उन्हें लेडी डफरिन हॉस्पिटल, कोलकाता के साथ एक नौकरी की पेशकश की गई, जिसके बाद उन्होंने अपना अभ्यास शुरू किया।डॉ.कादम्बिनी गांगुली भारत की पहली महिला स्नातक और पहली महिला फ़िजीशियन थीं।यही नहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी कादम्बिनी गांगुली को ही मिला था।डॉ.कादम्बिनी गांगुली पहली दक्षिण एशियाई महिला थीं, जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में ट्रेनिंग ली थी।
International Women’s Day 2023: पहली महिला कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एसआई पद्मावती
International Women’s Day 2023: देश की पहली महिला कार्डियोलॉजिस्ट होने का श्रेय डॉ. शिवरामकृष्ण अय्यर पद्मावती को जाता है।बर्मा में जन्मी, पद्मावती ने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई रंगून मेडिकल कॉलेज से की, जिसके बाद वह 1949 में लंदन चली गईं। यहां पर उन्होंने रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन, लंदन से एक एफआसीपी प्राप्त किया। उसके बाद रॉयल कॉलेज ऑफ़ फिजिशियन, एडिनबर्ग से एफआरसीपीई का कोर्स किया। कार्डियोलॉजी में रुचि बढ़ने से पहले उन्होंने लंदन के कई फेमस हॉस्पिटल में प्रैक्टिस शुरू की।आगे पढ़ाई करते हुए, उन्होंने महसूस किया कि भारत में कार्डियोलॉजी को वह महत्व नहीं मिला, जितना की मिलना चाहिए था। अपनी मातृभूमि पर लौटकर, उन्होंने न केवल देश का पहला कार्डियोलॉजी क्लिनिक खोला, बल्कि भारतीय मेडिकल कॉलेज में पहला कार्डियोलॉजी विभाग भी बनाया और हार्ट डिजीज के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भारत की पहली हृदय नींव की स्थापना की। साल 1992 में पद्म विभूषण (1992) पाने वाली पद्मावती ने राष्ट्रीय हृदय संस्थान, दिल्ली के निदेशक और अखिल भारतीय हृदय फाउंडेशन की संस्थापक भी रहीं।
International Women’s Day 2023: एमजीएम मेडिकल कॉलेज की पहली एमबीबीएस छात्रा बनीं डॉ. भक्ति यादव
डॉ. भक्ति यादव भक्ति यादव का जन्म 3 अप्रैल 1926 को उज्जैन के पास महिदपुर में हुआ। 1937 में जब लड़कियों का पढ़ना बुरा माना जाता था, तब भक्ति ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की। उनकी इस जिद के चलते उनके पिता ने उन्हें पढ़ने के लिए स्कूल भेजा। स्कूली पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज में वह एमबीबीएस कोर्स के पहले बैच की पहली महिला छात्रा थीं। 1952 में उन्हें एमबीबीएस की डिग्री हासिल हुई। उन्होंने कई जगह नौकरी की और बाद में घर पर ही नार्सिंग होम खोलकर मरीजों को चेकअप शुरू किया। संपन्न परिवार के मरीजों से भी वह नाममात्र की फीस लेती थीं और गरीब मरीजों का इलाज तो फ्री में किया करती थीं। वर्ष 2011 में उन्हें निःशुल्क चिकित्सा सेवा के लिए पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया।
International Women’s Day 2023: देश को पहली टेस्ट ट्यूब बेबी की सौगात देने वालीं डॉ. इंदिरा हिंदुजा
International Women’s Day 2023: डॉ. इंदिरा हिंदुजा ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है।देश को पहला टेस्ट ट्यूब बेबी देने का श्रेय इन्हीं को जाता है।
डॉ. इंदिरा हिंदुजा का जन्म शिकारपुर (पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन के बाद वह परिवार के साथ भारत आ गईं थीं।
डॉ. हिंदुजा ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से स्त्री रोग विज्ञान में एमडी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में लगा दिया। हजारों लोगों का इलाज किया, लेकिन इतिहास रचने वाले तारीख यानि 6 अगस्त 1986 को आज भी याद किया जाता है। केईएम हॉस्पिटल में उन्होंने देश को पहली टेस्ट ट्यूब बेबी की सौगात दी थी। आज भले ही टेस्ट ट्यूब बेबी बहुत आम बात हो, लेकिन उस दौर में यह काफी दुर्लभ था। इस क्षेत्र में उनके प्रयासों के लिए, उन्हें 2011 में सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
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