Human Development Index में दो स्थान नीचे फिसला भारत, जीवन प्रत्याशा 69.7 वर्ष से घटकर हुई 67.2 वर्ष, जानिए भारत और अन्य देशों के बारे में क्या बताती है ये रिपोर्ट

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) किसी भी देश की स्वास्थ्य, शिक्षा और औसत आय की स्थिति को प्रदर्शित करता है. सूचकांक को चार मापदंडों पर मापा जाता है - जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष, स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI).

0
211
Human Development Index में दो स्थान नीचे फिसला भारत, जीवन प्रत्याशा 69.7 वर्ष से घटकर हुई 67.2 वर्ष, जानिए भारत और अन्य देशों के बारे में क्या बताती है ये रिपोर्ट - APN News

गुरुवार 8 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा वर्ष 2021-22 की मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) – “Uncertain Times, Unsettled Lives: Shaping our Future in a Transforming World” को जारी कर दिया गया.

रिपोर्ट में भारत दो पायदान नीचे खिसकर 132वें स्थान पर पहुंच गया है.

UNDP की 2021-22 की रिपोर्ट में एक ऐसे वैश्विक समाज को दिखाया गया है जो एक के बाद एक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है, और जो बढ़ते अभावों व अन्यायों के जोखिम का भी सामना कर रहा है.

UNDP 1

रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलावों, पृथ्वी के अस्तित्व से सम्बन्धित खतरनाक परिवर्तनों,  और ध्रुवीकरण में बेतहाशा वृद्धि का माहौल भी अपनी तरह की चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं. ये चुनौतियां भारत (India) के मानव विकास मूल्य के लिए भी जिम्मेदार थीं, जो 2021-22 में 2020 की रिपोर्ट में 0.645 से गिरकर 0.633 हो गई. नए विश्लेषण के अनुसार, इस कमी ने देश को मध्यम मानव विकास श्रेणी में रखा है.

दुनिया के 90 फीसदी देशों में वर्ष 2020 या 2021 में अपने मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) मूल्य में गिरावट दर्ज की गई है.

चार मापदंडों से तय होती है रैंकिंग

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) किसी भी देश की स्वास्थ्य, शिक्षा और औसत आय की स्थिति को प्रदर्शित करता है. सूचकांक को चार मापदंडों पर मापा जाता है – जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष, स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI).

भारत की स्थिति

भारत के मानव विकास सूचकांक मूल्य में 2018 में 0.645 से 2021 में 0.633 तक की गिरावट को जन्म के समय गिरती जीवन प्रत्याशा के रुप में भी देखा जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष 11.9 वर्ष हैं और स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष 6.7 वर्ष हैं. वहीं देश में प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय 5.23 लाख रुपये है.

Youth in a tractor trolley 1 1
Human Development Index

संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के अनुसार, “देश (भारत) स्वच्छ पानी, स्वच्छता और सस्ती स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच में सुधार कर रहा है.” भारत में सरकार द्वारा किए गए हालिया नीतिगत निर्णयों ने कमजोर आबादी समूहों के लिए सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच बढ़ाई है.

भारत में स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष 11.9 वर्ष है, जो 2020 की रिपोर्ट में 12.2 वर्ष से कम है, हालांकि स्कूली शिक्षा के औसत वर्ष 2020 की रिपोर्ट में 6.5 वर्ष से बढ़कर 6.7 वर्ष हो गया है.

भारत ने लिंग विकास सूचकांक (Gender Development Index) में अपना 132वां स्थान बरकरार रखा है, लेकिन महिला जीवन प्रत्याशा 2020 की 71 वर्ष की तुलना में गिरकर 2021 में 68.8 वर्ष हो गई है. इसी अवधि में महिलाओं के लिए स्कूली शिक्षा के लिए औसत वर्ष 12.6 से घटकर 11.9 वर्ष हो गये.

Girls Education 1

भारत ने बहु-आयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) में 27.9 फीसदी के अनुपात के साथ 0.123 स्कोर किया है, जिसमें अनुसार भारत की 8.8 फीसदी आबादी गंभीर बहुआयामी गरीबी से जूझ रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक दशक में, भारत ने बहुआयामी गरीबी से 27.1 करोड़ लोगों को बाहर निकाला है.

Poverty in India 1

जीवन प्रत्याशा में गिरावट
2020 में भारत का मानव विकास सूचकांक 0.645 था जो 2021 की रिपोर्ट में घटकर 0.633 तक आ गया है. मानव विकास सूचकांक में गिरावट को जीवन प्रत्याशा में गिरावट 69.7 से 67.2 वर्ष के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मानव विकास लगातार दो सालों में घटा है, इससे पिछले पांच सालों में देश में हुई प्रगति भी प्रभावित हुई है. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मानव विकास सूचकांक में भारत की गिरावट विश्व के अन्य देशों की भांति ही है.

Education 1 1

ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मानव विकास सूचकांक जारी गिरावट में सबसे बड़ा योगदान जीवन प्रत्याशा दर में वैश्विक स्तर पर लगातार हो रही गिरावट का भी है. वर्ष 2019 में जो जीवन प्रत्याशा 72.8 वर्ष थी वो 2021 में घटकर 71.4 वर्ष हो गई है.

पड़ोसी देशों की स्थिति

भारत के पड़ोसी देशों में मानव विकास सूचकांक में श्रीलंका का स्थिति सबसे अच्छी है ओर वह 73वें स्थान पर है. इसी के साथ चीन को 79वां, भूटान को 127वां, बांग्लादेश को 129वां, नेपाल को 143वां और पाकिस्तान को 161वां स्थान प्राप्त हुआ है.

टॉप 5 देश?

मानव विकास सूचकांक की रिपोर्ट में यूरोपीय देशों का दबदबा है, जिसमें स्विटजरलैंड को पहला स्थान मिला है, इसके बाद नॉर्वे को दूसरा एवं आइसलैंड को तीसरा स्थान मिला. चौथे स्थान पर एशियाई देश हांगकांग रहा तो वहीं पांचवें स्थान पर ऑस्ट्रेलिया रहा.

तीन दशकों में पहली बार लगातार गिरावट

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा पिछले लगभग 32 वर्षों से मानव विकास सूचकांक (HDI) को लेकर रिपोर्ट जारी करता है, लेकिन UNDP के अनुसार इस सूचकांक में पिछले दो वर्षों में वैश्विक स्तर पर लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है.

इस सूचकांक में, अनेक क्षेत्रों में गहराते संकटों के संकेत दिये गए हैं, और विशेष रूप से लातिनी अमेरिका, कैरीबियाई, सब सहारा अफ्रीका, और दक्षिण एशिया क्षेत्र कुछ ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

मानव विकास पीछे की तरफ जाकर, 2016 के स्तर पर पहुंच गया है, जिससे, टिकाऊ विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) के लक्ष्यों को पूरा करने क लिए हासिल की गई प्रगति उलट गई है.

सूचकांक दर्शाता है कि राजनैतिक इच्छाशक्ति और नवाचार के बदौलत बहुत कुछ हासिल किया जा सकता है.

कोरोना को लेकर चुनौतियां

जारी कि गई रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में जारी टीकाकरण प्रयासों ने विकासशील और विकसित देशों के बीच विषमताओं को भी उजागर किया है. अनेक निम्न-आय वाले देशों में कोरोनारोधी टीकों की उपल्बध्ता बहुत कम है, जिससे लड़कियां और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं. इससे उनके कंधों पर घर-परिवार व देखभाल की जिम्मेदारी बढ़ी है और उन्हें हिंसा का भी सामना करना पड़ रहा है.

अनिश्चितताओं भरे दौर में जीवन

कोविड-19 वैरीएंटस की एक के बाद एक आ रही लहरों और भविष्य में नई महामारियों के उभरने की चेतावनी के बीच, अनिश्चितता का माहौल और अधिक गहरा हुआ है.

तकनीकी दुनिया में तेज गति से आ रहे बदलाव और उससे कार्यस्थल पर होने वाले प्रभावों, और जलवायु संकट से जूझ रही दुनिया के लिये हालात और जटिल हो गए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि “मानव इतिहास में पहली बार, अस्तित्व के लिये मानव-जनित खतरों का साया, प्राकृतिक जोखिमों से कहीं बड़ा है.”

संयुक्त राष्ट्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के इस्तेमाल से सम्बन्धित नियामक तैयार कर रहा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here