केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार IAS Cadre Rules 1954 में संशोधन करने जा रही है। संशोधन के प्रस्ताव को लेकर हाल ही में राज्य सरकारों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आईएएस अफसरों की सूची भेजने को कहा गया था। जिसके बाद से विवाद देखने को मिल रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने IAS Cadre Rules में संशोधन का का विरोध किया है। उन्होंने कहा है कि यह यह संघीय ढांचे के खिलाफ है।
IAS Cadre Rules को लेकर ममता बनर्जी का पक्ष

ममता बनर्जी द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मुझे संशोधित प्रस्ताव पूर्व की तुलना में अधिक कठोर लग रहा है। यह हमारी संघीय राजनीति की नींव और संवैधानिक योजना के बुनियादी ढांचे के खिलाफ है। ममता बनर्जी की तरफ से कहा गया है कि आईएएस और आईपीएस अफसरों की पोस्टिंग को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच मौजूदा व्यवस्था बेहद सामंजस्य औऱ समन्वय वाली है। उन्होंने कहा कि इसमें बदलाव उचित नहीं होगा।
क्या है IAS Cadre Rules?
वर्तमान में IAS Cadre Rules के अनुसार एक अधिकारी को संबंधित राज्य सरकार और केंद्र सरकार की सहमति से ही केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधीन सेवा के लिये प्रतिनियुक्त किया जा सकता है। इस नियम के मुताबिक किसी भी असहमति के स्थिति में केंद्र सरकार निर्णय लेती और राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के निर्णय को लागू किया जाएगा।
नए नियम पर क्यों है विवाद?
जानकारी के अनुसार कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की तरफ से इस महीने की 12 तारीख को सभी राज्य सरकारों को एक पत्र लिखा गया है जिसके में आईएएस कैडर 1954 के नियमों में संशोधन की बात कही गयी है। पत्र में कहा गया है कि अधिकारी जिसे केंद्र प्रतिनियुक्ति पर चाहता है अपने संबंधित कैडर से ‘रिलीफ रहें’। पत्र में कहा गया है कि इसके लिए राज्य सरकारों की सहमति अनिवार्य नहीं है।
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