साल 2021 के बजट सत्र की शुरूवात हो चुकी है। वित्ती मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आज बजट पेश किया। सीतारमण तीसरी बार बजट पेश कर रही हैं। कोरोना काल को ध्यान में रखते हुए इस बार बजट सत्र को पेपर मुक्त कर दिया गया था। सब कुछ टैब द्वारा पेश हुआ। इसमें मशीन लर्निंग का जिक्र किया गया है। बजट में इस तरह का शब्द पहली बार सुनाई दिया। कहा गया कि इस साल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस किया जाएगा। सुनने में समझ नहीं आता है कि ये मशीन लर्निंग क्या है, सरकार इस पर जोर क्यों देना चाहती है।

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मशीन लर्निंग के हम सब आदी हैं। बहुत कम ही लोग हैं जो मशीन लर्निंग के बिना रहते हैं। दरअसल गूगल या यूट्यूब पर जो भी हम बोल कर सर्च करते हैं उसे ही मशीन लर्निंग कहा जाता है। साल 2021 के बजट में सरकार मशीन लर्निंग पर जोर देने के लिए कह रही है।

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मशीन लर्निंग का खास बात ये है कि, मशीन बिना कोडिंग के ही सिस्टम अपडेट कर लेती है। दअरसल ऐसा होता है कि, उसके पूर्व में एकत्रित डेटा के आधार पर। मशीन लर्निंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित होती है। वक्त के साथ मशीन लर्निंग को लोग काफी महत्व दे रहे हैं।

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मशीन में इंसान की तरह दिमाग दिया जाता है। जिससे वो खुद के हिसाब से फैसले लेता है। जो भी हम सर्च करते हैं उसे याद रखने लगता है। बाद में भविष्य में जाकर वो काम करता है।

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हालांकि, ये लर्निंग डेटा के आधार पर होता है। भूतकाल में मशीन ने क्या सर्च किया है, उसी के आधार पर आगे जवाब दिया जाता है। उदाहरण के लिए- अगर आपने अमेजन पर मोबाइल सर्च किया है तो आपको गूगल से लेकर फेसबुक आदि पर मोबाइल के ऐड दिखने लगेंगे। ये है मशीन लर्निंग।

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हेल्थ सेक्टर में मशीन लर्निंग का बड़ा इस्तेमाल होता है। अब कई बड़ी मशीनों में इस तकनीक के जरिये जानलेवा बीमारियों को पहचानने का गुण आ गया है। कैंसर जैसी बीमारियों को मशीन लर्निंग के जरिये तुरंत पहचान लिया जाता है।

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मशीन लर्निंग का आने वाला समय काफी उज्जवल रहेगा। किसी भी व्यक्ति को परिणाम पाने के लिए बहुत कम समय का इंतजार करना पड़ेगा। आने वाले समय में ये मनुष्य के जीवन में एक अच्छा योगदान निभाने वाला है।

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