DU: दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर्स के डेटा की मांग को लेकर घमासान होता नजर आ रहा है। दरअसल, शिक्षकों की ओर से इस मामले में आपत्ति जताई गई है। डीयू की कार्यकारी परिषद कादमिक परिषद और डूटा कार्यकारी के 11 सदस्यों ने डीयू के कुलपति योगेश सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया कि ये डेटा केवल असिस्टेंट प्रोफेसरों से ही क्यों मांगा जा रहा है?

DU: गर्भावस्था समेत मांगी गई कई जानकारियां
सभी स्तर पर असिस्टेंट प्रोफेसरों से वोटर-आईडी नंबर, विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, महिला शिक्षकों की गर्भावस्था जैसे निजी जानकारी मांगी जा रही है। डेटा को लेकर डीयू के कुलपति को लिखे पत्र में कहा गया कि जिस तरह से डेटा मांगा गया है, उससे चुनाव ड्यूटी के लिए इस्तेमाल किए जाने की पूरी आशंका पैदा हो गई है।
शिक्षकों ने कहा है कि शिक्षकों को चुनाव में शामिल करने का कोई भी प्रयास छात्रों के हित में नहीं होगा। 11 अक्टूबर को लिखे पत्र में शिक्षकों ने यह भी उल्लेख किया है कि इस तरह के डेटा संग्रह के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। क्या यह नोडल अधिकारी अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय की सुविधा प्रदान करेगा?
पत्र में आगे कहा गया कि यह यूजीसी द्वारा अनुमोदित और भारत के राजपत्र में प्रकाशित सेवा शर्तों का उल्लंघन है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने यह भी स्वीकार किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक कभी भी चुनाव-संबंधी कर्तव्यों में शामिल नहीं थे क्योंकि दिल्ली विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्था है और राज्य सरकार के दायरे में नहीं आती।
शिक्षकों ने कुलपति से विश्वविद्यालय के संबंधित कार्यालय को यह स्पष्ट करने का निर्देश देने को कहा कि यह जानकारी क्यों एकत्र की जा रही है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों को चुनाव संबंधी कर्तव्यों में शामिल करने का कोई भी प्रयास छात्रों के हित में नहीं है।
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