Nebulizer: पिछले कुछ दिनों से राजधानी में एक्यूआई का लेवल खराब है।प्रदूषण का असर अब बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है।ऐसे में पहले ही दमा और एलर्जी से परेशान बच्चों की दिक्कत खासतौर पर बढ़ गई है।प्रदूषण और बदलती जीवनशैली से बच्चों की सेहत पर खासा असर देखने को मिल रहा है।जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित उनका स्वशन तंत्र है। क्योंकि ठंड के दिनों में प्रदूषक तत्व हवा में नीचे ही होते हैं।
ऐसे में एलर्जी के कण सांस के जरिये शरीर के अंदर जाने पर सांस की नली को प्रभावित करते हैं।बच्चों को सांस लेने में काफी मुश्किल होती है।इस समस्या से निजात पाने के लिए डॉक्टर्स बेशक उन्हें नेबुलाइजर या इनहेलर दे रहे हैं,लेकिन इनके इस्तेमाल के दौरान भी हमें कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। आइये जानते हैं नेबुलाइजर के इस्तेमाल में क्या सावधानियां बरतें ?

Nebulizer: बच्चों के खान-पान का रखें पूरा ख्याल
Nebulizer: डॉक्टर्स का कहना है कि एलर्जी हमें किसी भी चीज से हो सकती है।कुछ बच्चों को किसी खास अनाज या खाने की वस्तु से एलर्जी होती है। ऐसे में पहले इसका टेस्ट किया जाता है। मसलन अगर किसी बच्चे को दूध या गेहूं से एलर्जी है, तो डॉक्टर इस तरह का खानपान बताते हैं, ताकि बच्चे में पोषण की कमी न हो।ऐसे में बिना कोई टेस्ट करवाए, बच्चों की अलग डाइट रखने की भूल करने से बचें।
Nebulizer: खुद से दवाएं देने की कोशिश करने से बचें
कई डॉक्टर्स का कहना है कि अक्सर माता-पिता बच्चों को एक बार नेबुलाइजर से आराम मिलने के बाद अगली समस्या होने पर बजाय डॉक्टरी परामर्श के अपने मन से दवाएं देने लगते हैं। ऐसा करने से बचने की कोशिश करें।
इसके असर से बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। घरेलू उपचारों में समय गंवाने की जगह एलर्जी के कारण को समझें, इसके बाद इसके कणों से बच्चे को बचाएं। लेकिन बदलते मौसम के दौरान अपने बच्चे को पानी की भाप जरूर दिला सकते हैं।समस्या बढ़ने पर किसी अच्छे फेफड़े रोग विशेषज्ञ से मिलने का प्रयास करें।
Nebulizer: नेबुलाइजर देने से पूर्व इन बातों पर न करें नजरअंदाज
- नेबुलाइजर का मास्क दो से तीन सप्ताह के दौरान जरूर साफ करें।अगर एक से ज्यादा बच्चों को नेबुलाइजर की जरूरत है, तो हर बच्चे के लिए अलग मास्क और माउथपीस इस्तेमाल में लाएं
बच्चों को एक बार पूरी दवा दें।इस दौरान बच्चे को परेशानी होने पर कुछ देर के लिए रूकें। सामान्य सांस होने पर दोबारा दें।किट में डाली गई दवा को बहुत देर तक न रखें।
नेबुलाइजर के बाद बच्चों को कुल्ला जरूर करवाएं, इससे उनके गले में इन्फेक्शन होने के चांस बहुत कम हो जाते हैं।
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