दिल्ली का इंडियन हैबिटैट सेंटर (India Habitat Centre) इन दिनों प्रकृति की मनमोहक छवियों और रंगों से गुलजार है। मशहूर फोटोग्राफर झूमा दत्ता (Jhuma Dutta) की छठी सोलो फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘प्रकृति-राग’ (Prakriti Raga) में देश-विदेश के मनमोहक प्राकृतिक नजारों को बेहद कलात्मक अंदाज में पेश किया गया है। इंडिया हैबिटेट सेंटर स्थित नेशनल विजुअल आर्ट्स एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत (CJI Surya Kant) ने किया, जहां कला, न्याय और सांस्कृतिक जगत की कई नामचीन हस्तियां भी मौजूद रहीं।
कला और फोटोग्राफी चिंतन के लिए स्थान बनाते हैं: CJI सूर्यकांत
सीजेआई सूर्य कांत ने मंगलवार को हुए इस आयोजन में कहा कि कला और फोटोग्राफी अक्सर न्यायिक परिवारों के भीतर आत्ममंथन और चिंतन का माध्यम बन जाती हैं। उन्होंने कहा कि आज के तेजी से भागते और बेचैन समय में कला हमें ठहरकर चीजों को गहराई से देखने और महसूस करने की सीख देती है।
इसके साथ ही उन्होंने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि इसमें ‘साइलेंस’, ‘फ्लो’, ‘रिदम’ और ‘एनर्जी’ जैसे विषयों को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है।
‘साइलेंस’ थीम में दिखा प्रकृति का सन्नाटा
प्रदर्शनी की पहली थीम ‘साइलेंस’ यानी मौन है। इस सेक्शन में लद्दाख की नुब्रा वैली और दुबई के शांत रेगिस्तानी इलाकों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इन तस्वीरों में प्रकृति का वह शांत पक्ष दिखाई देता है, जहां शब्दों से ज्यादा खामोशी संवाद करती है।

रेगिस्तान की सुनहरी रेत और पहाड़ों की स्थिरता दर्शकों को एक अलग ही सुकून और आत्मिक शांति का अनुभव कराती है।
लहरों में जिंदगी का ‘फ्लो’
प्रदर्शनी की दूसरी थीम ‘फ्लो’ है, जिसमें समुद्र की उग्र लहरों और उनकी निरंतर गति को कैमरे में कैद किया गया है। ओडिशा के पुरी और गोवा के वागाटोर बीच की तस्वीरें इस सेक्शन का मुख्य आकर्षण हैं।

इन तस्वीरों के जरिए जिंदगी के उतार-चढ़ाव, गति और ऊर्जा को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने की कोशिश की गई है।
अंडमान से नॉर्वे तक ‘रिदम’ का एहसास
‘रिदम’ यानी लय थीम में अंडमान के नीले समंदर और नॉर्वे के बर्फीले पहाड़ों की तस्वीरें शामिल हैं। प्राकृतिक रंगों और प्रकाश के संतुलन ने इन तस्वीरों को बेहद जीवंत बना दिया है।

दर्शकों को ऐसा महसूस होता है मानो प्रकृति खुद किसी संगीत की तरह बह रही हो।
प्रकृति हमें ठहरकर खुद से जुड़ना सिखाती है: झूमा दत्ता
कार्यक्रम के दौरान झूमा दत्ता ने कहा कि उनकी फोटोग्राफी प्रकृति के साथ उनके गहरे और लंबे समय से जुड़े रिश्ते से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने हमेशा उन्हें ऊर्जा, शांति और जीवन का एहसास कराया है।

दत्ता के मुताबिक, उनकी तस्वीरें केवल दृश्य नहीं हैं, बल्कि ऐसे पल हैं जो लोगों को ठहरकर खुद से और अपने आसपास की दुनिया से दोबारा जुड़ने का मौका देते हैं। उन्होंने कहा, “प्रकृति मेरे लिए सिर्फ खामोशी नहीं, बल्कि भावनाओं, लय और जीवंतता से भरी एक अनुभूति है। मैं अपनी तस्वीरों के जरिए उन एहसासों को लोगों तक पहुंचाना चाहती हूं।”
उन्होंने आगे कहा कि बदलती रोशनी, बहता पानी, शांत जंगल और विशाल आसमान हमेशा उन्हें आकर्षित करते रहे हैं। उनके अनुसार प्रकृति हमें संतुलन, बदलाव और नए जीवन का संदेश देती है।
15 साल का सफर, 60 से ज्यादा तस्वीरें
झूमा दत्ता पिछले 15 वर्षों से प्रकृति और लैंडस्केप फोटोग्राफी से जुड़ी हुई हैं। शुरुआत पारिवारिक यात्राओं के दौरान तस्वीरें लेने से हुई थी, लेकिन समय के साथ यह शौक पेशेवर फोटोग्राफी यात्राओं में बदल गया।

इस प्रदर्शनी में करीब 60 से अधिक तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें भारत के साथ-साथ इटली, नीदरलैंड्स और कजाकिस्तान जैसी जगहों के दृश्य शामिल हैं।
साल 2019 में उन्होंने इटली के डोलोमाइट्स की यात्रा की थी। इसके बाद 2023 में वह एक अंतरराष्ट्रीय फोटोग्राफी टूर के तहत नीदरलैंड्स पहुंचीं। पिछले वर्ष उन्होंने कजाकिस्तान में ड्रोन फोटोग्राफी के साथ भी प्रयोग किया।
कला और न्याय जगत की मौजूदगी
‘प्रकृति-राग’ प्रदर्शनी के उद्घाटन और प्रदर्शन के दौरान कला, न्याय और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के अलावा, न्यायाधीश विक्रम नाथ (Vikram Nath), न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया (N. V. Anjaria) और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) सहित कई गणमान्य लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
बताते चलें कि झूमा दत्ता, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश दीपांकर दत्ता (Dipankar Datta) की पत्नी हैं।
24 मई तक खुली रहेगी प्रदर्शनी
‘प्रकृति-राग’ प्रदर्शनी 24 मई तक इंडिया हैबिटेट सेंटर की विजुअल आर्ट्स गैलरी में आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी।
फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह प्रदर्शनी एक अनोखा अनुभव साबित हो सकती है। झूमा दत्ता अब अपनी अगली फोटोग्राफी यात्रा के लिए जुलाई में इंडोनेशिया जाने की तैयारी कर रही हैं।
‘प्रकृति-राग’ केवल तस्वीरों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्रकृति के अलग-अलग भावों और अनुभवों की एक दृश्य यात्रा है। झूमा दत्ता की तस्वीरें यह एहसास कराती हैं कि प्रकृति केवल देखने की चीज नहीं, बल्कि महसूस करने का अनुभव भी है।
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