पहाड़ों में घट रही Springs की संख्‍या, शहरीकरण और वनों के खत्‍म होने से हो रहा नुकसान

Springs: आगामी पीढ़ी के लिए इन जल स्‍तोत्रों को बचाना बेहद जरूरी हो गया है, ऐसे में हम कुछ नियमों का पालन कर इन्‍हें लुप्‍त होने से बचा सकते हैं।

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Springs
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Springs: उत्‍तराखंड की सुरम्‍य वादियों में कुदरत का दिया सबकुछ है, लेकिन लगातार तेज होते शहरीकरण और वनों के खत्‍म होने से प्राकृतिक संसाधन हमसे दूर होते जा रहे हैं।भूमि की अंदरूनी सतह में स्थित टेक्टोनिक प्लेट्स के हिलने तथा एक दूसरे से टकराने के कारण पहाड़ों और पथरीली चट्टानों में पड़ी दरारों से निकल रहे जल स्‍तोत्र ही ‘स्प्रिंग्स’ कहलाते हैं। पहाड़ों में इन प्राकृतिक जल स्रोतों का पानी पीने के लिए सबसे अधिक शुद्ध तथा उत्तम माना जाता है, लेकिन प्रदूषण और कुदरत से हो रही छेड़छाड़ से ये लगभग समाप्‍त होते जा रहे हैं।उत्‍तराखंड के सुदूर पहाड़ों में नदियों से दूर बसे अनेक गांवों में आज भी पीने का पानी का मुख्‍य स्‍तोत्र ये ‘स्प्रिंग्स’ ही हैं।

Springs of kumaon region.
Springs of Hills rich source of Pure Water.

Springs: नदियों का प्रवाह और जानवरों की बुझाते हैं प्‍यास

स्प्रिंग्स न केवल मनुष्यों के लिए बल्कि अनेक नदियों के जल प्रवाह तथा जंगली जानवरों के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।स्प्रिंग्स का पानी न केवल साल भर बहने वाली नदियों में मिलकर उनके जल प्रवाह को बढ़ाने में सहायता करता है। इसके साथ ही अनेक छोटी नदियों या धाराओं को जन्म देता है। जंगलों में जानवरों के लिए भी जल स्रोत का मुख आधार है।

Springs: तेजी से सिमट रहा भूजल स्‍तर

हॉट स्प्रिंग्‍स लुप्‍त होने की सबसे बड़ी वजह लगातार तेजी से सिमट रहा भूजल स्‍तर भी है। पेड़ों का लगातार होता कटाव और मृदा अपरदन से बड़ी ही तेजी से मिटटी का कटाव हो रहा है। फलनस्‍वरूप वर्षा का जल भूमि में रिसने की बजाय यूं ही सतह के उपर तेजी से बहकर नष्ट हो जाता है। यही वजह है कि प्राकृतिक संसाधन बिल्‍कुल समाप्‍त हो रहे हैं।तेजी से घटते भूजल स्तर के कारण आज कई स्प्रिंग्स या तो सूख चुके हैं या फिर सूखने की कगार पर हैं।

Springs: अल्‍मोड़ा में 360 से घटकर 60 हुए जल स्‍तोत्र

Springs of Hills and low level of water.
Springs of Hills rich source of Pure Water.

पर्यावरणविदों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर की खोज सन 1563 में हुई थी। उस दौरान अल्मोड़ा अपने पानी की सप्‍लाई के लिए हमेशा से प्राकृतिक जल स्रोतों मसलन हॉट स्प्रिंग्स पर ही निर्भर था। एक वक़्त था जब अल्मोड़ा शहर में लगभग 360 प्राकृतिक जल स्रोत हुआ करते थे, लेकिन आज उन स्रोतों की संख्या घटकर मात्र 60 रह गई है। पिछले 150 वर्षों में होते शहर के विकास तथा तेजी से नष्ट होते आसपास के बांज के जंगलों का असर इस शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों पर पड़ा है।

इसके साथ ही यहां की जीवनदायिनी कहलाने वाली कोसी नदी का जलस्तर भी घट रहा है।आलम ये है कि आज अल्मोड़ा शहर को पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जिसका असर इस शहर के लोगों की जीवन शैली तथा उनकी खेती पर पड़ा है।

Springs: इन तरीकों से बचा सकते हैं जल स्‍तोत्र

आगामी पीढ़ी के लिए इन जल स्‍तोत्रों को बचाना बेहद जरूरी हो गया है, ऐसे में हम कुछ नियमों का पालन कर इन्‍हें लुप्‍त होने से बचा सकते हैं। आइये जानते हैं क्‍या हैं इन्‍हें बचाने के तरीके।

  • अधिक से अधिक पौधे रोपें
  • बच्‍चों को वनों का महत्‍व बताएं
  • प्राकृतिक वनस्‍पति का संरक्षण करें
  • पानी का घर कहलाने वाले बांज, बुरुश, उत्‍तीस आदि पेड़ों को बचाएं
  • बांज के पौधे लगाएं और दूसरों को भी लगाने के लिए प्रेरित करें
  • इको क्‍लब की स्‍थापना करें
  • वर्षा जल संचयन का प्रबंध करें
  • पानी का महत्‍व समझें
  • शहरीकरण की जगह प्राकृतिक आवास को बढ़ाएं
  • पुराने बचे जल स्‍तोत्रों के पास सफाई रखें, उनका संरक्षण करें

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