E-Vehicles: लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अब जल्द ही नई योजना पर काम हो रहा है। दरअसल कॉमर्स की गतिविधियां बढ़ने से सामान की डिलीवरी करने वाले वाहनों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसकी वजह से वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ता जा रहा है। प्रदूषण को रोकने के लिए किए गए सर्वे में 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि ऑनलाइन सामान की डिलीवरी के लिए ई-वाहनों का इस्तेमाल किया जाए।
मसलन इलेक्ट्रिक स्कूटर अथवा रिक्शे। इनके इस्तेमाल से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा।सस्टेनेबल मोबिलिटी नेटवर्क की ओर से किए गए सर्वे में ये बात सामने आई है कि लोग पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हैं, यही वजह है कि ई-वाहन की उपयोगिता पर जोर दे रहे हैं।

E-Vehicles: सर्वे में बोले लोग-ई-वाहन की कंपनियों को देंगे वरीयता

देश के 6 महानगरों में करीब 9,048 लोगों पर सर्वे किया गया, इस दौरान करीब 78 फीसदी उपभोक्ताओं ने डिलीवरी वाहनों के सवाल पर ई-वाहन का नाम लिया।लोगों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए जल्द से जल्द इलेक्ट्रिक वाहनों को अपना लेना चाहिए।
सर्वे के अनुसार करीब 19 फीसदी लोगों ने कहा कि डिलीवरी साझेदारों को अपने वर्तमान वाहन ई-वाहन में तब्दील करने के लिए मदद दी जानी चाहिए। उपभोक्ताओं ने कहा कि वे ऐसी कंपनियों को तरजीह देंगे जोकि ई-वाहन को अपनाएंगे।
E-Vehicles: ई-वाहन बेचने वाली कंपनियों को मिलेगा प्रोत्साहन
ई-वाहनों का चलन बढ़ने से इनका उत्पादन और विक्रय करने वाली कंपनियों को लाभ होगा।इसके साथ ही प्रदूषण का स्तर भी घटेगा।डिलीवरी के बेड़ों में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ने से सभी को फायदा होगा। महाराष्ट्र सरकार ने इस बाबत एक ब्लू प्रिंट भी तैयार किया है।
इसके तहत वर्ष 2025 तक डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं के लिए करीब 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने का लक्ष्य तैयार किया है। वहीं दिल्ली की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर स्कीम के मसौदे में 1 अप्रैल 2030 तक 100 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लक्ष्य के साथ है।
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