बॉलीवुड के मशहूर प्रोडक्शन हाउस आरके स्टूडियो में आग लग गई है। जानकारी के अनुसार, मौके पर दमकल की 6 गाड़ियां और पानी के 5 टैंकर पहुंच चुके हैं। आग की वजह इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। खबरों के अनुसार इस आग से एक हाल पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। ये स्टूडियो मुंबई के चेंबूर में स्थित है।

इसकी स्थापना शोमैन राज कपूर ने की थी। मौजूदा समय में इसका कामकाज ऋषि कपूर देखते हैं। अभी दो दिन पहले ही ऋषि कपूर ने आर.के. स्टूडियों को फिर से जिंदा किए जाने के बारे में अपने विचार व्यक्त किए थे।

शोमैन राजकपूर ने आर. के. प्रोडक्शन हाउस और स्टूडियो को अपनी जी-जान से खड़ा किया था। इस स्टूडियो की नींव आजादी के एक साल बाद 1948 में रखी गई थी। यहां सबसे पहली फिल्म ‘आग’ बनी थी जो इतनी हिट हुई की उसने वास्तव में पर्दे में आग ही लगा दी थी। इसके बाद तो ये सिलसिला जारी रहा और  ‘बरसात’, ‘आवारा’, ‘श्री 420’, ‘मेरा नाम जोकर’, ‘बूट पॉलिश’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ और ‘आ अब लौट चलें’ जैसी तमाम मशहूर फिल्में यहां बनीं। आर. के. स्टूडियो ने कई आयाम गढ़े।  हिंदी सिनेमा के इतिहास की कई कालजयी तस्वीरें यहां बनीं।

यहां त्यौहारों पर रौनक देखते ही बनती थी। फिर मौका गणेश उत्सव का हो या होली के हुड़दंग का। उस दौर के फिल्मी दुनिया के सभी सितारे आर. के. स्टूडियो में महफिल जमाते थे। आर. के. स्टूडियो की होली एक यादगार मौके की तरह होती थी जिसका सितारे पूरे साल इंतजार करते थे।

पर एक समय ऐसा भी जब आर. के. स्टूडियो के पास पैसों की कमी होने लगी। उस मुश्किल वक्त में राज कपूर की गर्लफ्रेंड और हिंदी सिनेमा की महान अभिनेत्री नरगिस ने उनका साथ दिया।  मधु जैन अपनी किताब ‘फ़र्स्ट फ़ैमिली ऑफ़ इंडियन सिनेमा- द कपूर्स’ में लिखती हैं, “नरगिस ने अपना दिल, अपनी आत्मा और यहां तक कि अपना पैसा भी राज कपूर की फ़िल्मों में लगाना शुरू कर दिया। स्टूडियो के पास पैसों की कमी हुई तो नरगिस ने अपने सोने के कंगन तक बेच डाले।” राज कपूर भी नरगिस के इस अहसान को नहीं भूले। वो बोलते थे , ‘मेरी बीबी मेरे बच्चों की मां है, लेकिन मेरी फिल्मों का मां तो नरगिस ही हैं।”

इस आग ने आर.के स्टूडियो की मधुर यादों से जुड़ी कई हस्तियों के दिलों को बेचैन कर दिया। उनका दर्द सोशल मीडिया पर छलक उठा।

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