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Hyderabad Or Bhagyanagar: भारत की जमीन पर शायद ही कोई ऐसा कोना हो जहां प्रेम के बीज अकुंरित ना हुए हों। ऐसा ही एक शहर बसाया गया भाग्यनगर जिसे आज के समय में हैदराबाद के नाम से जाना जाता है। इस कथन की पुष्टि हम नहीं करते बल्कि इससे जुड़ी कई ऐतिहासिक कहानियां हैं। जिस शहर के नाम को लेकर अलग- अलग दांवे हैं।
रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद को भाग्यनगर कह कर संबोधित किया। जिसके बाद हर तरफ इसके कनेक्शन को लेकर सरगर्मी तेज हो गई। इससे पहले भी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाग्यनगर का जिक्र कर चुके हैं। हैदराबाद के भाग्यनगर (Hyderabad Or Bhagyanagar) कनेक्शन को लेकर 3 अलग- अलग कहनियां काफी प्रचलित हैं। तीनों कहानियों के अपने- अपने तथ्य और तर्क हैं।
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Hyderabad Or Bhagyanagar: हिंदू लड़की के प्रेम में बसाया भागनगर
सबसे पहली कहानी भाग्यनगर (हैदराबाद) के बसने की कहानी है। एक सुल्तान और लड़की के प्रेम की। सन 1564-1612 ईस्वी में गोलकुंडा सल्तनत के पांचवें सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह की प्रेम कहानी आज भी बहुत चर्चित है। बताया जाता है कि एक बार वो घुड़सवारी करते हुए कुली मूसी नदी के पार चिचलम गांव पहुंचे। सुल्तान ने वहां ‘भागमती’ को देखा। भागमती को देखते ही सुल्तान अपना दिल उसपर हार बैठे।
एक आम लड़की और राजकुमार के बीच प्रेम परवान चढ़ा और सुल्तान अक्सर नदी पार भागमती से मिलने जाने लगे। यह बात राजकुमार के पिता को नागवार थी, उन्होंने सुल्तान इब्राहिम को गोलकुंडा किले में कैद कर दिया। कैद में रहे सुल्तान ने अपनी प्रेमिका को कई खत लिखे। बाद में पिता की मौत के बाद इब्राहिम कुतुब शाह राजा बने और शहर का नाम प्रेमिका भागमती के नाम पर रख दिया। दोनों के विवाह के बाद भागमती का नाम बदल कर हैदर बेगम पड़ गया और शहर का नाम हैदराबाद पड़ा।
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हालांकि इस कहानी से जुड़े कई सवाल और जवाब हैं। कई इतिहासकारों ने भागमती के अस्तित्व को माना है जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वो इतनी मशहूर थी तो उनके नाम पर कोई किला क्यों बनाया गया। इतिहासकार और लेखक नरेंद्र लूथर ने भी भागमती के होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि कम से कम तीन विदेशी यात्रियों ने इसका जिक्र किया है। इनमें थेवेनॉट डी वर्नियर, मनुची और मेथवॉल्ड शामिल हैं।
Hyderabad Or Bhagyanagar: भाग्यलक्ष्मी मंदिर के नाम पर शहर भाग्यनगर
हैदराबाद के मशहूर चारमीनार के करीब बांस के खंभे और तिरपाल से बना एक मंदिर है, जिसका नाम भाग्यलक्ष्मी मंदिर है। कहा जाता है कि 1930- 40 के बीच मुसलमानों का वर्चस्व काफी बढ़ने लगा। जिसके बाद आर्य समाज ने शहर में ‘भाग्यनगर सत्याग्रह’ के नाम से अभियान चलाया।
भाग्यलक्ष्मी देवी मंदिर के नाम पर चलाया गया ये अभियान सफल रहा और इसकी वजह से शहर का नाम भाग्यनगर पड़ा। इस मंदिर के अस्तित्व को लेकर कई सवाल- जवाब है जो सुलझे नहीं हैं। साल 2013 में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में मंदिर के होने की बात का खंडन किया और चारमीनार के पास ऐसे निर्माण को अवैध निर्माण बताया।
नानीशेट्टी शिरीष की किताब ‘गोलकुंडा,हैदराबाद और भाग्यनगर’ में एक नक्शा छापा गया जिसमें भाग्यनगर के होने का जिक्र है। हालांकि कई किताबों में हैदराबाद के भाग्यनगर होने के सबूतों के बावजूद से पूरी तरह से पुख्ता सबूत नहीं माने जा रहे हैं। इन्हें लेकर कई तरह के सवाल अभी भी बरकारर हैं।
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Hyderabad Or Bhagyanagar: बहुत सारे बागों के कारण नाम पड़ा बागनगर
14वीं सदी के दौरान गोलकुंडा दुनिया का सबसे बड़ा हीरे के खजाने का शहर था। व्यापार के नजरिये से शहर काफी अच्छा था। 16वीं सदी में शहर में काफी आबादी बढ़ने और नए इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण शहर में गंदगी फैल गई। इसके बाद बड़े- बड़े लोग मूसी नदी के किनारे बड़े- बड़े फार्म हाउस बना कर रहने लगे, जहां उन्होंने खूब बाग-बगीचे लगाए।
1580 ईस्वी में सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने इस शहर को गोलकुंडा की राजधानी बनाने का फैसला किया। 1591 ईस्वी में कुतुब शाह के प्रधानमंत्री ने इस शहर को नए सिरे से बनाया और नाम दिया हैदराबाद।
इस कहानी को लेकर तर्क दिया जाता है, 16वीं सदी में प्रकाशित किताब रायवाचकम जो कि ज्योतिषी बाबादी पंथूलु द्वारा रचित है। उसमें शहर का नाम बागनगरम बताया गया है। ऐसे ही इतिहासकार सज्जाद शाहीद ने अपने एक इंटरव्यू में बागों वाले शहर को बाग नगर कहा है। हालांकि इसके विरोध में सवाल उठते हैं कि इस शहर को बसाने के पीछे क्या कारण थे इससे जुड़े सबूत पूरे क्यों नहीं मिलते।
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