शाहरुख की फिल्म बाजीगर किसको याद नहीं होगी जिसमें कई साल बाद ‘कंपनी’ की बागडौर फिर अपने सही मालिक के हाथों में आ जाती है। ठीक उसी तरह अब एक फिल्म हकीकत का रूप धारण करते हुई नजर आ रही है। जी हां, अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही एयर इंडिया की बागडौर एक बार फिर टाटा ग्रुप के हाथों में आ जाएगी। आज से 85 साल पहले एयर इंडिया की स्थापना करने वाले टाटा ग्रुप को कंपनी का नियंत्रण छोड़ना पड़ा था, लेकिन टाटा ग्रुप अब फिर से एयर इंडिया को अपना हिस्सा बनाना चाहता है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वो एयर इंडिया पर सोच समझकर फैसला लेंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल एयर इंडिया के कर्ज और स्ट्रक्चर पर जानकारी कम है जिसे समझने के बाद एयर इंडिया पर फैसला लिया जाएगा। अगर टाटा ग्रुप एयर इंडिया का अधिग्रहण कर लेता है तो वह एयर इंडिया का स्वामित्व उसके राष्ट्रीयकरण होने के 64 साल बाद पा लेगा।
बता दें कि सरकार घाटे में चल रही एयर इंडिया को बेचने की तैयारी में है। वह काफी दिनों से इस जुगत में लगी है कि कोई इसे खरीद ले। 1932 में मशहूर उद्यागपति जेआरडी टाटा ने इस एयरलाइंस की नींव रखी थी। उस वक्त इसका नाम एयर इंडिया नहीं बल्कि टाटा एयरलाइंस हुआ करता था। टाटा जब 15 साल के थे, तभी से उन्हें हवाई जहाज उड़ाने का शौक था। उन्होंने बकायदा इसकी ट्रेनिंग ली और एक प्रोफेशनल पायलट बन गए। जिसके बाद टाटा ने अपनी एक एयरलाइंस कंपनी खोली। ‘हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस उन्हें 1929 में मिला। भारत में कमर्शल एविएशन लाने वाले वह पहले व्यक्ति थे। 1948 में उन्होंने एयर इंडिया इंटरनैशनल की स्थापना की। 1977 तक वह एयर इंडिया की जिम्मेदारी संभाले रहे। कंपनी के राष्ट्रीयकरण होने के बाद टाटा ने एयरलाइंस में चेयरमैन पद संभाल लिया। लेकिन मोरारजी देसाई ने 1977 में एयरलाइंस के चेयरमैन पद से हटा दिया और आज एयर इंडिया की हालत सबके सामने है। कंपनी पर भारी कर्ज है और यही कारण है कि सरकार इसका निजीकरण कर इससे छुटकारा पाना चाहती है।