राज्यसभा में बुधवार को एक विशेष विदाई समारोह आयोजित किया गया, जिसमें अप्रैल से जुलाई के बीच सेवानिवृत्त होने वाले 59 सांसदों को औपचारिक रूप से विदाई दी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन को संबोधित करते हुए सभी सांसदों के योगदान और अनुभव की सराहना की।
विदाई पाने वाले नेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा, वरिष्ठ नेता शरद पवार, राज्यसभा के सभापति हरिवंश और आरपीआई नेता रामदास आठवले जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि शरद पवार और रामदास आठवले दोबारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं।
पीएम मोदी: राजनीति में कभी नहीं होता पूर्ण विराम
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में कभी भी पूर्ण विराम नहीं होता। उन्होंने कहा कि संसद एक ऐसी जगह है जहां हर सदस्य अपने अनुभव और विचारों के माध्यम से लोकतंत्र को समृद्ध बनाता है।
प्रधानमंत्री ने संसद को “ओपन यूनिवर्सिटी” बताते हुए कहा कि यहां होने वाली चर्चाएं और बहसें सभी जनप्रतिनिधियों को सीखने और देश के लिए बेहतर निर्णय लेने का अवसर देती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जो सांसद अब विदा हो रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नए और पुराने संसद भवन का अनुभव
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ सांसद ऐसे हैं जिन्हें पुराने और नए दोनों संसद भवनों में बैठने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव अपने आप में ऐतिहासिक है और यह लोकतंत्र की निरंतरता को दर्शाता है।
उन्होंने भरोसा जताया कि नए सांसद भी आने वाले समय में इसी परंपरा और अनुभव से सीखकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाएंगे।
खड़गे के तंज पर सदन में ठहाके
विदाई सत्र के दौरान सदन में हल्का-फुल्का राजनीतिक माहौल भी देखने को मिला। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा को लेकर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा, “मोहब्बत हमसे की और शादी मोदी जी के साथ कर ली।”
उनकी इस टिप्पणी पर सदन में हंसी का माहौल बन गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुस्कुराते नजर आए।
सांसदों के अनुभव को बताया लोकतंत्र की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद में विभिन्न विषयों पर होने वाली बहसें और विचार-विमर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि सदन में मौजूद विविध अनुभव और दृष्टिकोण नीति निर्माण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जीवन और सामाजिक जीवन में बड़े फैसले लेने का अवसर सार्वजनिक सेवा के माध्यम से मिलता है और यही अवसर जनप्रतिनिधियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का मौका देता है।
लोकतांत्रिक परंपरा की निरंतरता
विदाई सत्र के दौरान कई नेताओं ने अपने अनुभव साझा किए और संसद में बिताए समय को लोकतंत्र की सेवा का महत्वपूर्ण अध्याय बताया।
यह समारोह केवल सांसदों को विदाई देने का अवसर ही नहीं था, बल्कि संसद की उस लोकतांत्रिक परंपरा को भी दर्शाता है जिसमें विचारों के मतभेद के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान किया जाता है।








