हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता देव आनंद अपने दौर के सबसे बड़े सुपरस्टार माने जाते थे। साल 2007 में जब उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी लॉन्च की थी, तो उनके चाहने वालों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला था। अभिनेता, लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले देव आनंद का निधन 2011 में हुआ, लेकिन उनकी यादें और किस्से आज भी लोगों के बीच जिंदा हैं। अब उनके करीबी दोस्त मोहन चूरीवाला ने देव आनंद से जुड़ा एक दिलचस्प वाकया साझा किया है, जिसमें उन्हें अमिताभ बच्चन के घर के बाहर इंतजार करना पड़ा था।
मोहन चूरीवाला ने बताया कि देव आनंद की ऑटोबायोग्राफी के लॉन्च कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन स्पेशल गेस्ट के तौर पर शामिल हुए थे। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान बिग बी किताब की कॉपी लिए बिना ही जल्दी वहां से निकल गए। इसके बाद देव आनंद चाहते थे कि वे अमिताभ बच्चन को अपनी किताब की एक प्रति खुद जाकर दें।
जलसा के बाहर करना पड़ा इंतजार
अगले दिन देव आनंद अमिताभ बच्चन के घर ‘जलसा’ पहुंचे ताकि उन्हें निजी तौर पर ऑटोबायोग्राफी की कॉपी भेंट कर सकें। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें गेट के बाहर करीब आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। यह पूरा किस्सा हाल ही में मोहन चूरीवाला ने फिल्म पत्रकार विक्की लालवानी को दिए एक इंटरव्यू में साझा किया।
मोहन ने बताया कि उस समय अमर सिंह बच्चन परिवार के काफी करीबी हुआ करते थे और उन्होंने ही अमिताभ बच्चन को बुक लॉन्च में बुलाने की जिम्मेदारी ली थी। मोहन के मुताबिक, अमर सिंह ने उनसे पूछा था कि क्या अमिताभ बच्चन को कार्यक्रम में बुलाया जाए, जिस पर उन्होंने सहमति दी थी। अमर सिंह ने यह भी कहा था कि अमिताभ बच्चन के साथ अनिल अंबानी और टीना अंबानी भी लॉन्च में आएंगे।
देव आनंद खुद जाने को हो गए तैयार
मोहन ने याद किया कि जब अमिताभ बच्चन किताब की कॉपी लिए बिना चले गए, तो देव आनंद थोड़ा कन्फ्यूज हो गए और उन्हें लगा कि शायद कहीं कोई बात बिगड़ तो नहीं गई। अमर सिंह से फोन पर बात करने के बाद तय हुआ कि अमिताभ बच्चन, अमर सिंह और अंबानी परिवार के लिए रखी गई किताबें खुद जाकर दी जाएं। शुरुआत में मोहन अकेले जाने वाले थे, लेकिन आखिरी वक्त पर देव आनंद ने भी साथ चलने की इच्छा जताई।
जब दोनों जलसा पहुंचे, तो उन्होंने हॉर्न बजाया। एक चौकीदार बाहर आया, जिसने आने की वजह पूछी और फिर अंदर चला गया। इसके बाद करीब 15 मिनट तक कोई जवाब नहीं मिला। इंतजार के दौरान मोहन ने अमर सिंह को फोन किया, लेकिन उनसे बात होने में भी लगभग 10 मिनट लग गए। इतने लंबे इंतजार पर देव आनंद ने कहा कि वे काफी देर से बाहर खड़े हैं और समझ नहीं पा रहे कि इतना समय क्यों लग रहा है। यह किस्सा आज भी देव आनंद के व्यक्तित्व और उस दौर के सिनेमा जगत की दिलचस्प झलक पेश करता है।









