अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बार फिर वैश्विक सुर्खियां बनीं, जब स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) में शामिल होने के लिए रवाना हुआ उनका विशेष विमान एयर फोर्स वन उड़ान के कुछ ही समय बाद तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल को प्राथमिकता देते हुए विमान को तुरंत मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रूज़ वापस लाया गया।
उड़ान के दौरान सामने आई इलेक्ट्रिकल खराबी
व्हाइट हाउस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, एयर फोर्स वन में इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी तकनीकी दिक्कत सामने आई थी। हालांकि किसी आपात स्थिति या खतरे की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए पायलट्स और सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन विमान को वापस उतारने का फैसला लिया।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि यह एक पूरी तरह से एहतियाती कदम था और इसमें घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप की दावोस यात्रा रद्द नहीं की गई है, बल्कि उन्हें दूसरे विमान से स्विट्ज़रलैंड भेजा जाएगा।
‘उड़ता हुआ व्हाइट हाउस’ है एयर फोर्स वन
गौरतलब है कि जिस विमान में अमेरिकी राष्ट्रपति यात्रा करते हैं, उसे आमतौर पर एयर फोर्स वन कहा जाता है। तकनीकी रूप से यह बोइंग 747-200B सीरीज़ का विमान होता है, जिसे अमेरिकी वायुसेना में VC-25A के नाम से जाना जाता है। अत्याधुनिक सुरक्षा, संचार और रक्षा प्रणालियों से लैस यह विमान किसी भी आपात स्थिति में राष्ट्रपति को सुरक्षित रखने में सक्षम माना जाता है। इसी वजह से इसे अक्सर “फ्लाइंग व्हाइट हाउस” भी कहा जाता है।
इतने उन्नत विमान में तकनीकी खराबी सामने आना भले ही दुर्लभ हो, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे मामलों में एहतियातन लैंडिंग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप ही होती है।
दावोस यात्रा बरकरार, एजेंडा अहम
राष्ट्रपति ट्रंप की दावोस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उनकी मौजूदगी वैश्विक अर्थव्यवस्था, युद्धग्रस्त क्षेत्रों और ऊर्जा नीति जैसे मुद्दों पर अमेरिका की भूमिका को रेखांकित करने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप इस मंच से व्यापार, टैरिफ और वैश्विक सुरक्षा को लेकर कड़े संदेश दे सकते हैं।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का सख्त रुख फिर दोहराया
इसी बीच, ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अपना आक्रामक रुख दोहराया है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए “अनिवार्य” है और इस मुद्दे पर “पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं” है।
व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वे ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं, तो ट्रंप का जवाब था—“आप समय आने पर खुद देख लेंगे।” इस बयान के बाद यूरोप और खासतौर पर डेनमार्क में एक बार फिर चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
तकनीकी घटना के बीच राजनीतिक संदेश भी तेज
एक ओर जहां एयर फोर्स वन की तकनीकी खराबी ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को सुर्खियों में ला दिया, वहीं दूसरी ओर ट्रंप के बयान यह संकेत देते हैं कि उनकी विदेश नीति पहले से कहीं अधिक आक्रामक और स्पष्ट होती जा रही है। दावोस में उनकी मौजूदगी और वहां दिए जाने वाले बयान आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर डाल सकते हैं।









