Pervez Musharraf: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने साल 1999 में नवाज शरीफ सरकार का तख्तापलट कर पाकिस्तान की सत्ता हासिल की थी। उन्होंने लगभग नौ साल तक पाकिस्तान पर हुकूमत की। बाद में चुनावी हार के बाद उनको सत्ता को अलविदा कहना पड़ा।
खास बात ये थी कि सत्ता में रहते हुए मुशर्रफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख बने रहे और उन्होंने अपने अधिकांश शासन के दौरान खुद को मुख्य कार्यकारी और बाद में राष्ट्रपति नियुक्त किया। सत्ता खोने के बाद से उनको चुनावी राजनीति में कोई खास कामयाबी नहीं मिली। मुशर्रफ 2014 में देशद्रोह का आरोप लगने के बाद से UAE में निर्वासित रहे।
दिल्ली में हुआ था जन्म

76 वर्षीय मुशर्रफ का जन्म भारत और पाकिस्तान के बंटवारे से चार साल पहले 1943 में दिल्ली में हुआ था। विभाजन के कुछ समय बाद, उनके माता-पिता दिल्ली छोड़ कर कराची चले गए। एक राजनयिक के बेटे, मुशर्रफ को 1964 में पाकिस्तान की सेना में कमीशन दिया गया था।

उन्होंने भारत के खिलाफ पाकिस्तान के लिए 1965 और 1971 की जंग भी लड़ी थी। बाद में सेना में उनको तरक्की मिली और 1998 में, तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा सेना प्रमुख नियुक्त किया गया।
नवाज शरीफ के साथ बिगड़े रिश्ते

अक्टूबर 1999 तक नवाज शरीफ और मुशर्रफ के बीच संबंधों में काफी खटास आ गई थी और शरीफ ने मुशर्रफ को बर्खास्त करने की सोची थी। हालांकि जब नवाज शरीफ श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा से वापस लौटे तो मुशर्रफ ने उनके विमान को लैंड ही नहीं होने दिया।
मुशर्रफ ने 9 साल तक संभाली पाकिस्तान की सत्ता
मुशर्रफ ने उस समय सेना को पाकिस्तान पर नियंत्रण करने का आदेश दिया और जैसे ही नवाज शरीफ उतरे। मुशर्रफ ने खुद को पाकिस्तान का “मुख्य कार्यकारी” बताते हुए देश में इमरजेंसी लगा दी। वह 2002 तक “मुख्य कार्यकारी” बने रहे। बाद में मुशर्रफ ने एक आम चुनाव आयोजित किया। जिसकी वैधता और निष्पक्षता व्यापक रूप से विवादित रही है। उनकी PML-Q सत्ता में आई और उन्हें राष्ट्रपति नियुक्त किया गया। मुशर्रफ 2008 तक हटाए जाने तक पाकिस्तान की सत्ता में रहे।

मुशर्रफ के सत्ता में रहते पाकिस्तान अमेरिका के War on Terror में भी सबसे आगे था। 2007 में, उन्होंने सेना को राजधानी इस्लामाबाद में एक मस्जिद पर हमला बोलने का आदेश दिया। इस घटना में 100 से अधिक लोग मारे गए थे।
विवादास्पद रूप से, मुशर्रफ ने नवंबर 2007 तक सेना प्रमुख का पद भी संभाला। उन्होंने अपने शासन के खिलाफ व्यापक विरोध के बाद दूसरा आपातकाल लागू किया। पाकिस्तान में मुशर्रफ का विरोध इतना व्यापक हो गया था कि उन्होंने खुद की सरकार को निलंबित कर दिया और सीधे तौर पर देश का शासन चलाने लगे। हालांकि बाद में उन्होंने इमरजेंसी हटा ली।

फरवरी 2008 में, एक आम चुनाव में मुशर्रफ की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। 2010 में, उन्होंने एक नई राजनीतिक पार्टी, ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एपीएमएल) की स्थापना की, लेकिन पार्टी पाकिस्तानी मतदाताओं की पसंद नहीं बन सकी।

2013 के चुनाव में नवाज शरीफ, प्रधानमंत्री के रूप में सत्ता में लौट आए और उनकी सरकार ने मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह का मामला शुरू किया। 2013 में, मुशर्रफ को कुछ समय के लिए नजरबंद किए जाने के बाद, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मुशर्रफ पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए कहा। मार्च 2016 में, मुशर्रफ ने इलाज का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट से इजाजत ली और दुबई जाने के लिए पाकिस्तान छोड़ दिया। इसके बाद वे अपने वतन नहीं लौटे।
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