पश्चिम एशिया एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के भीतर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। राजधानी तेहरान के कई इलाकों में देर रात तेज धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं, वहीं लेबनान की राजधानी बेरूत पर भी हवाई हमले की खबरें सामने आई हैं। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज़ होने से व्यापक संघर्ष की आशंका गहरा गई है।
IRGC मुख्यालय पर हमला, अमेरिका का बड़ा दावा
अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स [Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC)] के मुख्यालय को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। अमेरिकी यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड [United States Central Command (CENTCOM)] ने इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई “सांप का सिर काटने” के समान है—अर्थात ईरान की सैन्य कमान की रीढ़ को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी बयान के मुताबिक, IRGC पर पिछले कई वर्षों में 1,000 से अधिक अमेरिकी नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप रहा है, और इसी पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया।
तेहरान में दहशत, सुरक्षा अलर्ट
ईरान के कई शहरों—खासकर तेहरान—में विस्फोटों की खबरों के बाद सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। नागरिक इलाकों में एहतियात बढ़ा दी गई है और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। ईरानी मीडिया ने स्थिति को “तेज़ी से बदलती” बताया है, जबकि आम नागरिकों में भय और अनिश्चितता का माहौल है।
बेरूत पर बमबारी, क्षेत्रीय तनाव और बढ़ा
इज़राइल की ओर से बेरूत (Beirut) के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए जाने की भी सूचनाएं हैं। इससे लेबनान-इज़राइल सीमा पर पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान समर्थित समूहों पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
ब्रिटिश ठिकानों का इस्तेमाल, लंदन की सफाई
अमेरिका को यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) ने अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति दी है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने स्पष्ट किया कि ब्रिटेन ईरान पर सीधे हमलों में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल आत्मरक्षा और संभावित मिसाइल खतरों से निपटने के लिए की गई है, ताकि ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कूटनीति बनाम सैन्य दबाव
अमेरिका और इज़राइल का कहना है कि उनकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को सीमित करना है, जबकि ईरान इसे संप्रभुता पर हमला बता रहा है। क्षेत्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, यदि हालात जल्द नहीं संभले तो यह टकराव बहु-देशीय संघर्ष में बदल सकता है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में सैन्य तैनाती, हवाई गश्त और खुफिया गतिविधियां बढ़ गई हैं। तेल बाज़ार और वैश्विक व्यापार मार्गों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस पर है कि क्या बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या हालात और बिगड़ते हैं।









