UP News: मई में 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग पूरी, ऊर्जा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने बनाया नया कीर्तिमान

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    प्रतीकात्मक तस्वीर
    प्रतीकात्मक तस्वीर

    UP News: उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए मई 2026 में 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा किया है। प्रदेश के इतिहास में यह अब तक की सर्वाधिक बिजली आपूर्ति मानी जा रही है। भीषण गर्मी और बढ़ती खपत के बावजूद बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।

    एक समय बिजली संकट, लंबी कटौती और कमजोर वितरण व्यवस्था के लिए चर्चा में रहने वाला उत्तर प्रदेश अब देश के प्रमुख बिजली उपभोक्ता और आपूर्ति करने वाले राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। वर्ष 2017 के बाद ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करने और वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए, जिनका असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    मांग बढ़ी, आपूर्ति भी बनी मजबूत

    ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश ने 30,618 मेगावाट की अधिकतम मांग पूरी की थी। इसके बाद 2025-26 में यह आंकड़ा 31,486 मेगावाट तक पहुंचा और अब मई 2026 में 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग को पूरा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है।

    प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने के बावजूद बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव नहीं पड़ा। इसका लाभ घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों, व्यापारियों और उद्योगों को भी मिला।

    बिजली आपूर्ति के स्वरूप में बड़ा बदलाव

    वर्तमान में प्रदेश के जिला मुख्यालयों और महानगरों में लगभग 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। तहसील क्षेत्रों में भी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में 22 से 22.30 घंटे तक बिजली पहुंच रही है।

    इसके विपरीत वर्ष 2014 से 2017 के बीच जिला मुख्यालयों पर औसतन 17 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर लगभग 12 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 11 घंटे बिजली मिल पाती थी। उस दौर में बढ़ती मांग और सीमित उत्पादन के कारण उपभोक्ताओं को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

    उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी

    ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का सबसे बड़ा आधार बिजली उत्पादन क्षमता का विस्तार रहा है। मार्च 2014 में प्रदेश की उत्पादन क्षमता 4,839 मेगावाट थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से नई परियोजनाओं और क्षमता विस्तार पर कार्य किया गया।

    वर्ष 2019 तक यह क्षमता बढ़कर 5,474 मेगावाट हुई, जबकि 2022 में यह 6,134 मेगावाट तक पहुंच गई। मार्च 2026 तक प्रदेश की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 9,120 मेगावाट हो चुकी है, जो एक दशक पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है।

    ऊर्जा अवसंरचना पर निरंतर निवेश

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन के साथ-साथ ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क में किए गए निवेश ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। आधुनिक तकनीक, बेहतर निगरानी व्यवस्था और ग्रिड क्षमता में वृद्धि के कारण बढ़ती मांग के बावजूद आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है।

    यूपीपीसीएल के निदेशक (वितरण) ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी के अनुसार प्रदेश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा गर्मी के मौसम में भी उपभोक्ताओं को निर्धारित रोस्टर से अधिक बिजली उपलब्ध कराई जा रही है और भविष्य में सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे।

    ऊर्जा क्षेत्र में नई पहचान

    विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर प्रदेश का यह प्रदर्शन केवल रिकॉर्ड मांग पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के ऊर्जा ढांचे में आए व्यापक बदलाव का संकेत भी है। बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, कृषि क्षेत्र की जरूरतों और घरेलू खपत के बीच बिजली आपूर्ति को संतुलित रखना प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रहा है।

    मई 2026 का यह रिकॉर्ड इस बात का संकेत है कि उत्तर प्रदेश अब बिजली संकट से आगे निकलकर ऊर्जा प्रबंधन और आपूर्ति के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।