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सुनो भई साधो – संसद का मानसून सत्र और सांसदों की अभिव्यक्ति की नई डिक्शनरी

सोमवार 18 जुलाई से संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले हंगामा हो रखा है। संसदीय सचिवालय की ओर से सांसदों की अभिव्यक्ति के लिए एक नई डिक्शनरी सामने आई है.. ऐसे कई शब्द हैं जिन पर संसद के दोनों सदनों में सांसदों के बोलने पर बैन लगा दिया गया है…. विपक्ष का कहना है कि सरकार सांसदों की अभिव्यक्ति पर पहरेदारी करने की तिकड़म लगा रही है…क्या मानसून सत्र एक बार फिर से हंगामे की भेंट चढ़ेगा ओर क्या है ये नई डिक्शनरी ? बताएंगे आपको पूरी बात …. जुड़े रहिए हमारे साथ……नमस्कार….मैं मनीष राज…मेरे साथ …आप सुन रहे हैं ……समससामयिक चर्चाओं का विशेष पॉडकास्ट “सुनो भई साधो”…. इस खास कार्यक्रम में आप सभी का स्वागत है

साधो….लोकतंत्र के बारे में Abraham Lincoln ने कहा है “Democracy is the government of the people, by the people, for the people”…. लोकतंत्र जनता का जनता के द्वारा और जनता के लिए किया जाने वाला शासन है…. लेकिन देश के चुने हुए सांसदों का दुख यही है कि वह जनता के द्वारा चुने तो गए हैं लेकिन जनता की आवाज देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद में वह उठा नहीं सकते …

लोकसभा सचिवालय ने असंसदीय शब्दों एवं वाक्यों का नया संकलन तैयार किया है, जिन्हें ‘असंसदीय अभिव्यक्ति’ की श्रेणी में रखा गया है. संसद के सत्रों के दौरान राज्यसभा या लोकसभा के सदस्य अब चर्चा में हिस्सा लेते हुए जुमलाजीव, तानाशाही, नौटंकी और लॉलीपॉप, बाल बुद्धि सांसद, शकुनी, जयचंद, लॉलीपॉप, चांडाल चौकड़ी, गुल खिलाए, पिठ्ठू जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. ऐसे शब्दों के प्रयोग को अमर्यादित आचरण माना जायेगा और वे सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं होंगे.

ऐसे में सियासत गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इस कदम को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे इस आदेश को नहीं मानेंगे और इन शब्दों का इस्तेमाल करेंगे। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की शासन शैली का सटीक वर्णन करने वाले शब्दों पर रोक लगा दी गई है।

इस मामले पर सफाई आई लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से उन्होंने कहा कि पहले इस तरह के असंसदीय शब्दों की एक किताब का विमोचन किया जाता था… कागजों की बर्बादी से बचने के लिए हमने इसे इंटरनेट पर डाल दिया है। किसी भी शब्द पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, हमने हटा दिए गए शब्दों का संकलन जारी किया है। जिन शब्दों को हटाया गया है, वे विपक्ष के साथ-साथ सत्ता में पार्टी के सदस्यों की ओर से भी कहे और उपयोग किए गए हैं।

अभी यह मामला थमा भी नहीं था कि लोकसभा सचिवालय ने एक नई गाइडलाइन जारी की कि संसद के परिसर में धरना प्रदर्शन भूख हड़ताल किसी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी. पहले यह अक्सर देखा जाता था कि संसद के सदस्य अक्सर किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती थी तो सदन से वाक आउट करते थे और संसद के परिसर में स्थित गांधी मूर्ति के पास जाकर धरना देते थे भूख हड़ताल करते थे और सरकार की नीतियों का विरोध करते थे। लेकिन लोकसभा सचिवालय के नई गाइडलाइंस के बाद अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है।

बहरहाल एक पल के लिए यह मान भी लिया जाए यह कि यह एक संसदीय सचिवालय की ओर से की जाने वाली कागजी कार्रवाई है, तो इसकी जरूरत क्या है सांसद देश के चुने हुए जनप्रतिनिधि होते हैं ……वे संसद और जनता के प्रति जिम्मेदार और जवाबदेह होते हैं…. उन्हें अपनी गरिमा का ख्याल होता है तो ऐसे शब्दों के प्रयोग से बचते हैं और कभी चर्चा के दौरान कुछ सांसदों के द्वारा अगर असंसदीय शब्दों का प्रयोग होता भी है तो वह सदन की रिकॉर्डेड कार्यवाही से हटा दिया जाता है…

संसद के आने वाले मानसून सत्र में सरकार कुल मिलाकर के 24 विधेयक प्रस्तुत करने जा रही है और जिसके बाद सदन के हंगामेदार होने के पूरे आसार हैं….. देखने वाली बात यह होगी कि संसद के माननीय सदस्य गण नई संसदीय डिक्शनरी के नियम कानूनों को किस हद तक मानते हैं।

आज के लिए बस इतना ही। आपने अभी तक चैनल या पेज को सब्सक्राईब नहीं किया है तो जरुर करें… आपको हमारा पॉडकास्ट कैसा लगा…..इस बारे में कमेंट कर सकते हैं…इसे लेकर सुझाव दे सकते हैं…सुनो भई साधो में मैं फिर मिलूंगा….एक नए मुद्दे से आपको रुबरु कराने………तब तक के लिए आज्ञा दीजिए…..नमस्कार …आपका दिन शुभ हो।

Manish Raj
पत्रकार (Journalist) होने के नाते मेरी कोशिश रहती है कि मैं स्टोरी के अलसुलझे सवालों की तलाश करुं । इससे जुड़े संस्थाओं और लोगों पर जवाब देने की जवाबदेही का अहसास तब तक कराते रहूं जब तक सच से सामना न हो जाए।

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