भारत द्वारा 1 दिसंबर से G20 (विश्व बैंक एवं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रतिनिधि, यूरोपियन यूनियन एवं 19 देशों का समूह) की अध्यक्षता (G20 Presidency) संभालने के बाद से बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में भारत की जी20 अध्यक्षता में वित्त एवं केंद्रीय बैंक के उप-प्रमुखों (Finance and Central Bank Deputies Meeting) की पहली बैठक कर्नाटक के बेंगलुरु में मंगलवार से शुरू होगी।
क्या होगा बैठक का एजेंडा?
13 से 15 दिसंबर तक चलने वाली इस बैठक में ‘फाइनेंस ट्रैक’ एजेंडा पर चर्चा की शुरुआत होगी। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक संयुक्त रूप से करेंगे। भारत सरकार द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि “जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की अगुवाई वाले ‘जी20 फाइनेंस ट्रैक’ में आर्थिक एवं वित्तीय मुद्दों पर गौर किया जाएगा। यह वैश्विक आर्थिक विमर्श और नीति समन्वय के लिए एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराएगा।“ बयान में बताया गया है कि वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों की पहली बैठक बेंगलुरु में 23-25 फरवरी, 2023 को होगी।
कौन करेगा अध्यक्षता?
जी20 ‘वित्तीय और केंद्रीय बैंक के उप-प्रमुखों’ की आगामी बैठक की सह-अध्यक्षता आर्थिक मामलों (Economic Affairs) के विभाग में सचिव अजय सेठ और रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर डॉ। माइकल डी पात्रा करेंगे। जी20 सदस्य राष्ट्रों और कई अन्य देशों के उनके समकक्षों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भारत ने बैठक में शामिल होने का न्योता दिया है। बेंगलुरु की बैठक में भारत की जी20 अध्यक्षता में ‘फाइनेंस ट्रैक’ एजेंडा पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

200 से ज्यादा होंगी बैठकें
एक साल की अध्यक्षता के दौरान भारत ने G20 शिखर सम्मेलन तक देश भर के 55 शहरों में 200 से अधिक बैठकों की योजना बनाई है। इनमें से कुछ बैठकों की मेजबानी करने के लिए देश के उन हिस्सों का चुना गया है जिनके बारे में लोगों को बेहद कम जानकारी है। इतने शहरों को चुनने के पिछे का मकसद पीएम मोदी का वो उद्देश्य है जिसके तहत देश के सभी जिलों और ब्लॉक को G20 से जोड़ने और जनभागीदारी के जरिए जन-जन तक संदेश पहुंचाना है।
भारत करेगा G20 के शिखर सम्मेलन की मेजबानी
विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए बयान के अनुसार भारत अपनी अध्यक्षता में 9 और 10 सितंबर 2023 को G20 के नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।
क्या है G20 समूह?
1999 में G20 का गठन, दशक के अंत के वित्तीय संकट के चलते किया गया था, जिसने विशेष रूप से पूर्वी एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया (East and South East Asia) को प्रभावित किया था। G20 का मुख्य लक्ष्य मध्यम आय वाले देशों को शामिल करके वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करना है।
इसके प्रमुख नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हर वर्ष एक बार इकट्ठा होते है। इसके साथ ही, G20 दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन में 80 फीसदी से अधिक, कुल आबादी का 60 फीसदी और वैश्विक व्यापार के 75 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
1999 में उत्पन्न हुए अंतरराष्ट्रीय ऋण संकट के जवाब में G-7 के बड़े आकार के रूप में G20 बनाया गया था। शुरूआत में इसका प्रमुख उद्देश्य अपने सदस्यों के वित्त मंत्रियों के वार्षिक शिखर सम्मेलन और 2008 के बाद से प्रमुखों के बीच चर्चा के माध्यम से वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। G20 की अध्यक्षता और मेजबानी करने वाले देश प्रत्येक वर्ष सदस्य देशों के बीच में बदलता रहता है।
वहीं, G20 के पास अपना कोई स्थायी सचिवालय (Secretariat) नहीं है। G20 के लिए एजेंडा और कार्य का समन्वय देशों के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, जिन्हें ‘शेरपा’ कहा जाता है, जो केंद्रीय बैंकों के वित्त मंत्रियों और गवर्नरों के साथ मिलकर काम करते हैं। G20 वैश्विक आर्थिक एजेंडा को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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