उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा और कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने वाधवानी फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का उद्देश्य सहकारी गन्ना समितियों के सहयोग से संचालित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल, रोजगार अवसरों और उद्यमिता से जोड़ना है।
प्रदेश सरकार पहले ही सहकारी गन्ना समितियों से जुड़े इंटर कॉलेजों और महाविद्यालयों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर चुकी है। जर्जर भवनों के जीर्णोद्धार, अतिरिक्त कक्षों के निर्माण और शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार के बाद अब इन संस्थानों में पढ़ाई को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस. के अनुसार प्रदेश के नौ इंटर कॉलेजों एवं महाविद्यालयों में लगभग 15,440 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। बदलते रोजगार परिदृश्य को देखते हुए केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को संचार कौशल, तकनीकी दक्षता, नेतृत्व क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान और कार्यस्थल से जुड़े व्यवहारिक ज्ञान से भी लैस करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से पहले चरण में करीब 3,500 विद्यार्थियों को 75 से 90 घंटे का विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी और उद्योग आधारित कौशल सिखाए जाएंगे। इसमें प्रभावी संवाद कौशल, साक्षात्कार की तैयारी, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक लेखन, व्यक्तित्व विकास, डिजिटल साक्षरता, प्रस्तुतीकरण क्षमता, नेतृत्व कौशल और व्यावसायिक नैतिकता जैसे विषय शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को रोजगार बाजार की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।
इस पहल में छात्राओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान की भावना के अनुरूप बालिकाओं को कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर रहेगा। इससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
वाधवानी फाउंडेशन की ओर से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अत्याधुनिक एआई आधारित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) उपलब्ध कराया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वीडियो लेक्चर, अध्ययन सामग्री, मूल्यांकन मॉड्यूल, अभ्यास संसाधन और इंटरैक्टिव कंटेंट निःशुल्क उपलब्ध रहेगा। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण प्रणाली का लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘एंटरप्रेन्योरियल माइंडसेट प्रोग्राम’ भी होगा, जिसके माध्यम से युवाओं में उद्यमिता की सोच विकसित की जाएगी। उन्हें स्टार्टअप, नवाचार, व्यवसाय प्रबंधन, जोखिम विश्लेषण और स्वरोजगार के अवसरों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार सृजक भी बन सकें।
विद्यार्थियों को उद्योग जगत की नवीनतम जरूरतों और अवसरों से जोड़ने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन तथा ऑफलाइन कार्यशालाएं, मास्टरक्लास और करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को रोजगार, इंटर्नशिप और भविष्य की तकनीकों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होंगी।
गन्ना आयुक्त ने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को विशेष सहायता भी प्रदान की जाएगी। गन्ना समितियों और चीनी मिलों के सहयोग से ऐसे विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री, पुस्तकें और मोबाइल फोन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 20 विद्यार्थियों को विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे गन्ना समितियों से जुड़े शिक्षण संस्थानों के हजारों विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार, कौशल और उद्यमिता के अवसर मिलेंगे, जिससे ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के युवाओं के लिए नए रास्ते खुलेंगे।









