UP News: ‘6 जिलों में राष्ट्रनायकों, महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित, सदियों तक प्रेरणा देते रहेंगी’, बोले पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह

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UP News: उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और राष्ट्रनिर्माण में योगदान देने वाले महापुरुषों की स्मृतियों को सहेजने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में राष्ट्रनायकों, स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों और धार्मिक महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित कर उन्हें सम्मान देने की पहल की है।

प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इन प्रतिमाओं का उद्देश्य केवल स्मारक निर्माण नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देश के महान व्यक्तित्वों के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान से परिचित कराना है।

अयोध्या से फर्रुखाबाद तक स्थापित हुईं प्रतिमाएं

संस्कृति विभाग द्वारा अयोध्या के सूर्यकुंड में भगवान सूर्य नारायण की छह फीट ऊंची सैंड स्टोन प्रतिमा तथा गणेश कुंड में भगवान गणेश की 10 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। इसके अलावा अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि की कांस्य प्रतिमा भी लगाई गई है।

इसी तरह कासगंज के शहीद स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, सीतापुर के महमूदाबाद में महंत अवैद्यनाथ, प्रयागराज में कमला बहुगुणा तथा फर्रुखाबाद में महाराणा प्रताप की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।

कई नई परियोजनाओं पर भी चल रहा काम

पर्यटन मंत्री ने बताया कि बांदा में रानी अवंतीबाई, छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा छत्रसाल की अश्वारोही कांस्य प्रतिमाओं के निर्माण और स्थापना की प्रक्रिया जारी है। वहीं लखनऊ के चौक चौराहे पर भी छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य अश्वारोही प्रतिमा स्थापित की जा रही है।

इसके अलावा बुलंदशहर के नरौरा स्थित समाधि स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।

इतिहास से जुड़ाव और सांस्कृतिक चेतना पर जोर

जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल स्मृति-चिह्न नहीं होतीं, बल्कि वे समाज को प्रेरणा देने वाले स्थायी प्रतीक भी बनती हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि इन पहलों से प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों का महत्व बढ़ेगा और आने वाली पीढ़ियां देश के महान व्यक्तित्वों के योगदान को और बेहतर ढंग से जान सकेंगी।