Ropeway Accident In Jharkhand: झारखंड के देवघर जिले में रविवार दोपहर त्रिकूट हिल्स स्थित रोपवे पर तकनीकी खराबी के कारण लगभग 50 लोग इसमें फंस गए। हादसे के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और सीआईएसएफ द्वारा करीब 37 घंटों तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इस ऑपरेशन के माध्यम से रोपवे में फंसे लोगों को बचा लिया गया है। झारखंड पर्यटन विभाग के अनुसार त्रिकुट रोपवे भारत का सबसे ऊंचा वर्टिकल रोपवे है। यह लगभग 766 मीटर लंबा है।
सेना ने दिया रेस्क्यू अभियान को अंजाम
हादसे की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई करते हुए भारतीय वायुसेना ने सुबह एक एमआई-17 और एक एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर तैनात किया। IAF की टुकड़ी के पास ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए IAF गरुड़ कमांडो की एक टीम भी थी। वायुसेना ने ड्रोन के सहारे फंसे लोगों को आवश्यक खाने पीने की चीजें पहुंचाई। करीब 40 घंटे की मुश्किल ऑपरेशन चलाने के बाद बायुसेना ने सभी फंसे हुए लोगों को बचा लिया है।

बता दें कि सोमवार की सुबह 6 बजे से सेना, वायुसेना के हेलीकॉप्टर, एनडीआरएफ और आईटीबीपी ने मोर्चा संभाला। दोपहर होते-होते दो हजार फीट की ऊंचाई पर लटक रही 26 ट्रालियों में फंसे 20 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। सोमवार शाम को करीब 3 बजे के आस-पास हेलीकॉप्टर से एक दर्दनाक हादसा हो गया। ट्रॉली में फंसे लोगों को एयरलिफ्ट करने के दौरान एक शख्स अचानक नीचे गिर गया। मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जिसके बाद तुरंत ही राहत और बचाव कार्य रोक दिया गया।
मंगलवार को एक बार फिर शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
मंगलवार सुबह एक बार फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। जब सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया तो 10 लोग 2 हजार फीट की ऊंचाई पर ट्रॉलियों में फंसे हुए थे। सेना के जवानों ने कठिन परिस्थिति में इस बचाव अभियान को अंजाम दिया।

Ropeway Accident In Jharkhand: 3 लोगों की हुई मौत
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सोमवार और मंगलवार को हेलीकॉप्टर से गिर कर दो पर्यटक की मौत हो गई। इसके साथ ही हादसे में मरने वालों का आकड़ा 3 तर पहुंच गई। 12 घायलों का अस्पतालों में इलाज चल रहा है। सोमवार शाम सूर्यास्त के बाद बचाव अभियान को रोकना पड़ा क्योंकि रोपवे पहाड़ियों से घिरे घने जंगलों से होकर गुजरता है, जहां सुरक्षा बलों का पहुंचना मुश्किल था।
झारखंड उच्च न्यायालय ने लिया मामले पर संज्ञान
झारखंड उच्च न्यायालय ने देवघर रोपवे घटना का स्वत: संज्ञान लिया है और मामले की जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट इस मामले में 26 अप्रैल को सुनवाई करेगी। अधिकारियों के अनुसार, केबल कारों की टक्कर में तकनीकी खराबी के कारण हो सकता है, लेकिन दुर्घटना के सही कारण की अभी पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि घटना के बाद रोपवे प्रबंधक और अन्य कर्मचारी मौके से फरार हो गए थे।

Ropeway Accident In Jharkhand: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने व्यक्त की संवेदनाएं
इस मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संवेदन व्यक्त की है और मइस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की बात कही है. वहीं घायलों के जल्द ही स्वस्थ होने की कामना की है. उन्होंने इस मामले पर कहा कि रोपवे हादसे की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी. इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.
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