Lalu Prasad Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) के मुखिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) चारा घोटाले के डोरंडा मामले में दोषी ठहराए गए हैं। पूरा मामला डोरंडा कोषगार से 139 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रांची में स्थित सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। अभी तक सजा का ऐलान नहीं हुआ है। अगर लालू प्रसाद यादव को 3 साल से कम की सजा होती है तो जमानत मिल सकती है। अगर इससे अधिक सजा होगी तो, लालू प्रसाद यादव को फिर जेल में समय गुजारना पड़ेगा।
बता दें कि लालू प्रसाद यादव को अब तक चारा घोटाला के सभी मामलों में 3 साल की सजा मिली है। उन्हें चारा घोटाले से जुड़े चार मामलों में 14 साल की सजा सुनाई गई थी। साथ ही 60 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था।
Lalu Prasad Yadav की लोकसभा सदस्यता

गौर करने वाली बात है कि चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव के दोषी पाए जाने के बाद उनकी लोकसभा की सदस्यता समाप्त कर दी गयी थी। इसके अनुसार लालू प्रसाद यादव 11 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकते थें। लोक सभा के महासचिव ने यादव को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी की थी। संसद की सदस्यता गंवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोकसभा के पहले सांसद हैं।
लालू प्रसाद यादव के साथ जेडीयू के नेता जगदीश शर्मा को भी चारा घोटाला मामले में दोषी करार दिया गया था। लोक सभा ने इन्हें भी अयोग्य ठहराया था।
Lalu Prasad Yadav को पांच साल कारावास

15वीं लोक सभा में लालू प्रसाद यादव बिहार के सारण से सांसद थे। लेकिन हवा ने अपना रुख बदला और उनका नाम बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में सामने आया। रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा के लिए उन्हें बिरसा मुण्डा केंद्रीय कारागार रांची में रखा गाय है।
1997 में मुख्यमंत्री पद से दिया इस्तीफा
सीबीआई ने 1997 में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। इस समय लालू बिहार की गद्दी पर सवार थे। जब उन्हें जेल जाना पड़ा तो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर आरजेडी के अध्यक्ष बन गए। इस्तीफा देने के बाद लालू की गद्दी को उनकी पत्नी राबड़ी देवी बखूबी संभाला।
Lalu Prasad Yadav: कब क्या हुआ ?

27 जनवरी 1996: पशुओं के चारा घोटाले के रूप में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट का भंडाफोड़ हुआ चाईबासा ट्रेजरी से इसके लिये गलत तरीके से 37.6 करोड़ रुपए निकाले गये थे।
11 मार्च 1996: पटना उच्च न्यायालय ने चारा घोटाले की जाँच के लिये सीबीआई को आदेश दिया।
19 मार्च 1996: उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश की पुष्टि करते हुए हाईकोर्ट की बैंच को देख-रेख के लिए कहा।
27 जुलाई 1997: सीबीआई ने मामले में राजद सुप्रीमो पर फंदा कसा।
30 जुलाई 1997: लालू प्रसाद सीबीआई अदालत के सामने पेश हुएं।
19 अगस्त 1998: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की आय से अधिक की सम्पत्ति का मामला दर्ज कराया गया।
4 अप्रैल 2000: लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप पत्र दर्ज हुआ और राबड़ी देवी को सह-आरोपी बनाया गया।
5 अप्रैल 2000: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी का समर्पण, राबड़ी देवी को मिली जमानत।
9 जून 2000: अदालत में लालू प्रसाद के खिलाफ आरोप तय किये।
अक्टूबर 2001: सुप्रीम कोर्ट ने झारखण्ड के अलग राज्य बनने के बाद मामले को नये राज्य में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद लालू ने झारखण्ड में आत्मसमर्पण किया।
18 दिसम्बर 2006: लालू प्रसाद और राबड़ी देवी को आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में क्लीन चिट दी।
2000 से 2012 तक: मामले में करीब 350 लोगों की गवाही हुई। इस दौरान मामले के कई गवाहों की भी मौत हो गयी।
17 मई 2012: सीबीआई की विशेष अदालत में लालू यादव पर इस मामले में कुछ नये आरोप तय किये। इसमें दिसम्बर 1995 और जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पूर्ण निकासी भी शामिल है।
17 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
30 सितम्बर 2013: चारा घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव दोषी करार।
6 जनवरी 2018: को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने लालू प्रसाद को चारा घोटाला मामले में साढ़े तीन साल की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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